8. श्वसन Respiration

Respiration (श्वसन)

Respiration is the complex process of biological cells taking place in several orderly phases at normal temperature of the body, under which the organic matter is oxidized by organic oxidation and gradually released energy in a phased manner.

In human (as in most other animals) There are four major parts of respiration – :

Respiratory System of Humans
  1. Breathing: The process of breathing, or respiration, is divided into two distinct phases. The first phase is called inspiration, or inhaling. When the lungs inhale, the diaphragm contracts and pulls downward. At the same time, the muscles between the ribs contract and pull upward. The second phase is called expiration, or exhaling. When the lungs exhale, the diaphragm relaxes, and the volume of the thoracic cavity decreases, while the pressure within it increases. As a result, the lungs contract and air is forced out.
  2. Gaseous transport: Gas exchange is involved between blood and body cells.,
  3. Cellular respiration: Conversion of food to energy is included. And
  4. Tissue respiration: The terminal blood vessels, i.e. the capillaries deliver the oxygen to the body cells or tissues where oxygen diffuses through their thin walls and in a similar way, the capillaries pick up the carbon dioxide relaxed by them.

The ADP molecules present in the cell combine with the phosphate group to form ATP(Adenosine Triphosphate) molecules upon receiving energy. Where and when energy is required, ATP breaks down into ADP+P and the energy is released. Thus, the energy produced by the process of respiration is stored in the ATP itself.

ATP in cells accumulates energy from energy-producing reactions and gives energy-consuming reactions. Therefore, ATP is called Universal Carrier of Energy.

Respiratory Substrates are compounds that are oxidized in the process of respiration. They are called bronchial substances. Carbohydrate, fat and protein are the major bronchial substances.

श्वसन जैविक कोशिकाओं द्वारा शरीर के सामान्य ताप पर अनेक सुव्यवस्थित चरणों में होने वाली वह जटिल प्रक्रिया है जिसके अन्तर्गत कार्बनिक पदार्थों का जैविक ऑक्सीकरण द्वारा चरणबद्ध अपघटन होता है और धीरे-धीरे चरणबद्ध क्रम में ऊर्जा मुक्त होती है।

मानव में (अधिकांश अन्य जानवरों की तरह) श्वसन के चार प्रमुख भाग हैं: –

Ribs and diaphragm movements during breathing(inhalation and exhalation)
  1. श्वास: श्वास या श्वसन की प्रक्रिया को दो अलग-अलग चरणों में विभाजित किया गया है। पहले चरण को प्रेरणा, या साँस लेना कहा जाता है। जब फेफड़े साँस लेते हैं, तो डायाफ्राम सिकुड़ जाता है और नीचे की ओर खिंचता है। इसी समय, पसलियों के बीच की मांसपेशियां सिकुड़ती हैं और ऊपर की ओर खिंचती हैं। दूसरे चरण को समाप्ति, या साँस छोड़ना कहा जाता है। जब फेफड़े साँस छोड़ते हैं, तो डायाफ्राम आराम करता है, और वक्ष गुहा की मात्रा कम हो जाती है, जबकि इसके भीतर दबाव बढ़ जाता है। नतीजतन, फेफड़े सिकुड़ जाते हैं और हवा बाहर निकल जाती है।
  2. गैसीय परिवहन (Gaseous transport): रक्त और शरीर की कोशिकाओं के बीच गैस विनिमय शामिल है।
  3. कोशिकीय श्वसन (Cellular respiration): ऊर्जा के लिए भोजन का रूपांतरण शामिल है।
  4. ऊतक श्वसन(Tissue respiration): टर्मिनल रक्त वाहिकाएं, यानी केशिकाएं ऑक्सीजन को शरीर की कोशिकाओं या ऊतकों तक पहुंचाती हैं जहां ऑक्सीजन उनकी पतली दीवारों के माध्यम से फैलती है और इसी तरह केशिकाएं उनके द्वारा छोड़ी गई कार्बन डाइऑक्साइड उठाती हैं।

श्वसनी पदार्थ (Respiratory Substrates) श्वसन की प्रक्रिया में जो यौगिक ऑक्सीकृत होते हैं। उन्हें श्वसनी पदार्थ कहते हैं। कार्बोहाइड्रेट, वसा व प्रोटीन प्रमुख श्वसनी पदार्थ है।

कोशिका में उपस्थित ADP के अणु ऊर्जा पाने पर फॉस्फेट वर्ग के साथ संयुक्त होकर ATP(Adenosine Triphosphate) अणु बना लेते हैं। ऊर्जा की जहां तथा जब आवश्यकता होती है, ATP टूटकर ADP+P में परिवर्तित हो जाती है व ऊर्जा विमुक्त होती है। इस प्रकार ATP में ही श्वसन की प्रक्रिया से उत्पन्न ऊर्जा संग्रहीत होती है।

कोशिकाओं में ATP ही ऊर्जा-उत्पादक अभिक्रियाओं से ऊर्जा संचित करके ऊर्जा-उपभोगी अभिक्रियाओं को देता है। इसलिए ATP को ऊर्जा का सार्विक वाहन (Universal Carrier of Energy) कहते हैं।

श्वसनी पदार्थ (Respiratory Substrates) श्वसन की प्रक्रिया में जो यौगिक ऑक्सीकृत होते हैं। उन्हें श्वसनी पदार्थ कहते हैं। कार्बोहाइड्रेट, वसा व प्रोटीन प्रमुख श्वसनी पदार्थ है।

Types of Respiration

  1. Oxy Respiration: The presence of oxygen is essential in this type of respiration. There is complete oxidation of the bronchial substance, which results in the formation of CO2 and H2O and a considerable amount of energy is released.

C6H12O6 + 6O2 = 6CO2 + 6H2O + 686K or 38 ATP(chemical energy) + 420K Head energy

Oxy respiration occurs in most organisms. These are called oxy-organisms or aerobes. A molecule of glucose emits 73 kcal of energy.

  1. Anoxic Respiration: When respiration occurs in the absence of oxygen, it is called anoxic respiration. There is incomplete oxidation of bronchial matter. As a result, organic compounds are formed by ethyl alcohol, lactic acid, etc. At the same time energy is released. Water is not formed in this process. One molecule of glucose produces only 56 kcal of energy.

C6H12O6 = lactic acid (C3H6O3) / ethanol (C2H5OH)+ 2ATP + heat energy

Anaerobic respiration in PLANTS Anaerobic respiration in ANIMALS
1. Product of glucose are ethanol and CO2

2. Released heat energy is more

3. CO2 released causes foaming

1. Product of glucose is lactic acid (and no CO2)

2. Released heat and energy is less

3. No CO2 released, so no foaming

In inhalation, the air pressure in the lungs is reduced by 1 to 3 mm Hg from the atmosphere, which causes air to fill in the lung and come out of the respiratory tract. In respiration, the air pressure in the lung is higher by 1 to 2 mm Hg, which causes the air of the lung to exit through the respiratory tract. We inhale approximately 250 milliliters of oxygen per minute and exhale 220 milliliters of carbon dioxide. Breathing is measured by a spirometer. Four types of air volume related to lungs are important which are called pleural volumes or inhaled air volumes.

There are about 300 million brackets in both our lungs. There is a dense network of blood cells in the fine wall of the brackets. The inner shells of the brackets are nearly adjacent to the epithelium and the endo-thelium of the blood cells, and the two together form a respiratory art which are highly permeable to CO2 and O2.

The atmosphere air consists mainly of 78.98% nitrogen, 20.98% oxygen, 0.04% CO2 and 0.5% water vapor and a small amount of helium, argon and neon gases. About 2300 ml of functional residues, air are filled in brackets at all times.

Conduction of oxygen in blood – O2 has little ability to carry blood in the blood plasma because the solubility of O2 in water is low. That is why there is ‘haemoglobin’ for transporting O2 in the blood, which is an iron-bound protein. In Mollusca, Arthropoda and some other vertebrates, haemoglobin is replaced by ‘hemocyanin’.

The colour of haemoglobin is violet and the colour of oxy-haemoglobin is bright red after oxygenation. The average amount of haemoglobin in a normal person is 15 grams per 100 ml blood. One gram of haemoglobin binds to about 1.34 ml O2. Haemoglobin of 100 ml pure blood, ie oxyhaemoglobin, contains about 20 ml (15 × 1.34) O2.

श्वसन के प्रकार (Types of Respiration)

  1. ऑक्सी श्वसनः इस प्रकार की श्वसन क्रिया में ऑक्सीजन की उपस्थिति अनिवार्य होती है। श्वसनी पदार्थ का पूरा ऑक्सीकरण होता है जिसके फलस्वरूप CO2 व H2O बनते हैं तथा काफी मात्रा में ऊर्जा विमुक्त होती है।

C6H12O6 + 6O2 = 6CO2 + 6H2O + 673 K या 38 ATP(chemical energy) + 420K Head energy

अधिकांश जीवों में ऑक्सी श्वसन ही होता है। इन्हें ऑक्सी जीव या वायु जीव (Aerobes) कहते हैं। ग्लूकोज के एक अणु से 73 किलो कैलोरी ऊर्जा निकलती है|

  1. अनॉक्सी श्वसनः जब श्वसन ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है, उसे अनॉक्सी श्वसन कहते हैं। इसमें श्वसनी पदार्थ का अपूर्ण ऑक्सीकरण होता है। फलस्वरूप एथिल ऐल्कोहॉल, लैक्टिक अम्ल इत्यादि कार्बनिक यौगिक बनते हैं। साथ ही ऊर्जा मुक्त होती है। इस प्रक्रिया में जल नहीं बनता है। ग्लूकोज के एक अणु से केवल 56 किलो कैलोरी उर्जा प्रप्त होती है|

C6H12O6 = lactic acid (C3H6O3) / ethanol (C2H5OH)+ 2ATP + heat energy

पौधों में अवायवीय श्वसन जानवरों में अवायवीय श्वसन
1. ग्लूकोज के उत्पाद इथेनॉल और CO2 हैं

2. ऊष्मा ऊर्जा अधिक मुक्त होती है

3. CO2 का उत्पादन होता है जो झाग का कारण होता है

1. ग्लूकोज का उत्पाद लैक्टिक एसिड (और कोई CO2 नहीं है)

2. ऊष्मा उर्जा और ऊर्जा कम मुक्त होती है

3. CO2 का उत्पादन नहीं होता है, इसलिए कोई झाग नहीं

अन्तःश्वसन में फेफड़ों में वायु का दबाव वायुमंडल से 1 से 3 m.m. Hg कम हो जाता है जिसके कारण वायु श्वसन मार्ग से आकर फेफड़ो में भर जाती है। निःश्वसन में फेफड़ों में वायु का दबाव 1 से 2m.m. Hg तक अधिक हो जाता है जिसके कारण फेफड़े की वायु श्वसन मार्ग से होती बाहर निकल जाती है। हम श्वास द्वारा प्रतिमिनट लगभग 250 मिली ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं तथा 220 मिली कार्बन डाइ ऑक्साइड बाहर निकालते हैं। श्वास का मापन श्वासमापी (Spirometer) द्वारा किया जाता है। फेफड़ों से संबंधित वायु की चार प्रकार की मात्राएँ महत्वपूर्ण हैं जो फुस्फुसी मात्राएँ या श्वास वायु आयतन कहलाते हैं।

हमारे दोनों फेफड़ों में लगभग ‘30 करोड़ कोष्ठक’ होते हैं। कोष्ठकों की महीन दीवार में रुधिर कोशिकाओं का घना जाल होता है। कोष्ठकों की भीतरी शल्की एपीथीलियन तथा रूधिर कोशिकाओं की एण्डो-थीलियम लगभग सटी रहती है और दोनों मिलकर एक श्वसन कला बनाती है जो CO2 तथा O2 के लिए अत्यधिक पारगम्य होती हैं।

वायुमंडल की हवा में मख्यतः 78.98% नाइट्रोजन, 20.98% ऑक्सीजन, 0.04% CO2 तथा 0.5% जलवाष्प तथा सूक्ष्म मात्रा में हीलियम, आर्गन एवं नियॉन गैसे होती हैं। लगभग 2300 मिली कार्यात्मक अवशेष, वायु, वायु कोष्ठकों में हर समय भरी रहती है।

रूधिर में ऑक्सीजन का संवहन- रक्त के प्लाज्मा में O2 के वहन करने की क्षमता बहुत कम होती है क्योंकि जल में O2 की घुलनशीलता कम होती है। इसीलिए रक्त में O2 के संवहन के लिए ‘हीमोग्लोबिन’ होता है जो लौहयुक्त संयुक्त प्रोटीन होता है। मोलस्का, आर्थोपोडा तथा कुछ अन्य कशेरुकियों में हीमाग्लोबिन के स्थान पर ‘हीमोसाएनिन’ होता है।

हीमोग्लोबिन का रंग बैगनी तथा ऑक्सीजनीकरण के पश्चात् बने ऑक्सी हीमोग्लोबिन का रंग चमकीला लाल होता है। सामान्य व्यक्ति में हीमोग्लोबिन का मात्रा औसतन 15 ग्राम प्रति 100 मिली रुधिर होती है। एक ग्राम हीमोग्लोबिन लगभग 1.34 मिली. O2 को बाँधता है। 100 मिली. शुद्ध रुधिर की हीमोग्लोबिन अर्थात् ऑक्सीहीमोग्लोबिन में लगभग 20 मिली. (15×1.34) O2 बँधी होती है।

Conduction of carbon dioxide in the blood: Three types of CO2 convection from the tissues through the blood to the respiratory floor-

(i) Plasma in dissolved state, (ii) in the form of bicarbonate ions and (iii) carbamino compounds.

Cellular Respiration: The process of cellular oxidation is called cellular respiration. It has three major phases.

  1. Glycolysis: O2 is not used in it, but some energy is definitely free. Bacteria and the cells of some animals and plants produce energy by this method. At the same time, the sugars dissolve. This is called anoxic respiration, which is called glycolysis, the first stage of oxygenation.
  2. Krabs cycle or citric acid cycle: Carbon atoms are released from oxygen to form CO2, but hydrogen atoms take a special type of ‘hydrogen-receptor’ material. Since this series was described by Sir Hans Krabs, it is called the ‘Carbs cycle’. The cycle begins with the synthesis of 6 carbon citric acids. That is why it is also called the citric acid cycle. It is also known as the tri-carboxylic acid cycle.
  3. Electron transport mechanism: In glycolysis and Krabs cycle reactions, some energy is liberated and stored in ATP. The main purpose of these reactions is to separate most of the hydrogen atoms into NAD+ and some to FAD by separating hydrogen atoms from the fuel substances. Thus, a lot of potential energy is stored in the electrons of hydrogen atoms of NADH+H+, and FADH2. The molecules of NADH+H+4+ and FADH2 are oxidized back to NAD+ and FAD by assigning their hydrogen atoms to these chains so that they can participate again in the glycolysis and Krabs cycle. In these chains, hydrogen atoms are first fragmented into their ions (electrons and protons), and then only a few electron-sensitive proteins are exchanged electronically and transferred to another. That is why these chains are called electron transport mechanisms.

रुधिर में कार्बन डॉइऑक्साइड का संवहन : रुध्रि द्वारा उतकों से फेफड़ों के श्वसन तल तक CO2 का संवहन तीन प्रकार अवस्था में होता है-

(i) प्लाज्मा घुली अवस्था में, (ii) बाई कार्बोनेट आयनों के रूप में तथा (iii) कार्बेमिनों यौगिकों के रूप में होता है।

कोशिकीय श्वसन (Cellular Respiration) : कोशिकीय ऑक्सीकरण की प्रक्रिया को कोशिकीय श्वसन कहते हैं। इसके तीन प्रमुख चरण हैं|

  1. ग्लाइकोलासिस : इसमें O2 का उपयोग नहीं होता वरन् कुछ उर्जा अवश्य मुक्त होती हैं। जीवाणु तथा कुछ जन्तुओं एवं पादपों की कोशिकाएँ इसी विधि से उर्जा उत्पादन करती हैं। इसी समय शर्करा का विघटन होता है। इसे अनाक्सी श्वसन कहते हैं जो आक्सीश्वसन का प्रथम चरण ग्लाइकोलाइसिस कहलाता है।
  2. क्रैब्स चक्र या सिट्रिक अम्ल चक्र : कार्बन परमाणु ऑक्सीजन से मिलकर CO2 के रूप में मुक्त हो जाते हैं, परन्तु हाइड्रोजन परमाणुओं को विशेष प्रकार के ‘हाइड्रोजन-ग्राही’ पदार्थ ग्रहण करते हैं। इस श्रृंखला का वर्णन चूँकि सर हान्स क्रैब्स ने किया था, अतः इसे ‘कै्रब्स चक्र’ कहते हैं। चक्र का प्रारम्भ 6 कार्बनीय साइट्रिक अम्ल के संश्लेषण से होता है। इसीलिए इसे ‘साइट्रिक अम्ल चक्र’ भी कहते हैं। इसे ‘ट्राई कार्बोक्सिलिक अम्ल चक्र’ भी कहते हैं।
  3. इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्रा : ग्लाइकोलाइसिस एवं क्रैब्स चक्र की अभिक्रियाओं में कुछ उर्जा मुक्त होकर ATP में संग्रहित होती है। इन अभिक्रियाओं का मुख्य उद्देश्य ईंधन पदार्थों से हाइड्रोजन परमाणुओं को पृथक करके अधिकांश हाइड्रोजन परमाणुओं को NAD+ में और कुछ को FAD में स्थानान्तरित करने का होता है। इस प्रकार NADH+H+ , एवं FADH2 के हाइड्रोजन परमाणुओं के इलेक्ट्रॉन्स में बहुत सी विभव उर्जा संग्रहित होती है। NADH+H+4+ एवं FADH2 के अणु अपने हाइड्रोजन परमाणुओं को इन्हीं श्रृंखलाओं को सौंपकर वापस NAD+ और FAD में उपचयित हो जाते हैं ताकि ये ग्लाइकोलाइसिस एवं क्रैब्स चक्र में फिर से भाग ले सकें। इन श्रृंखलाओं में पहले हाइड्रोजन परमाणुओं का इनके आयनों (इलेक्ट्रॉन्स एवं प्रोटॉन्स) में विखण्डन होता है और फिर केवल इलेक्ट्रॉन्स को कुछ इलेक्ट्रानग्राही प्रोटीन्स बारी-बारी से ग्रहण करके दूसरी को सौंपती हैं। इसीलिए इन श्रृंखलाओं को इलेक्ट्रान परिवहन तंत्रा कहते हैं।