मुंडा विद्रोह : (1899-1900 ई.)

जनजातीय विद्रोह में सबसे संगठित और विस्तृत विद्रोह मुंडा विद्रोह था। बिरसा मुंडाके नेतृत्व में हुए इस विद्रोह को उलगुलान विद्रोह भी कहा जाता है। इस विद्रोह का मुख्य कारण था-दिकुओं एवं जमींदारों द्वारा शोषण एवं उत्पीड़न। तत्कालीन सामाजिक जीवन में जो मौलिक परिवर्तन आ रहे थे, उनके कारण आदिवासी समाज में चिंता का वातावरण था और लोग एक शांतिपूर्ण और आदर्श समाज की कल्पना से प्रेरित थे। बिरसा ने नैतिक आचरण की शुद्धता, आत्म-सुधार और एकेश्वरवाद का उपदेश दिया। उसने ब्रिटिश सत्ता के अस्तित्व को अस्वीकार करते हुए अपने अनुयायियों को सरकार को लगान न देने का आदेश दिया। उसके उपदेशों से अनेक लोग प्रभावित हुए, जिससे धीरे-धीरे बिरसा आंदोलन का व्यापक प्रसार हुआ। आगे चलकर यह आंदोलन असफल हो गया, किन्तु सामाजिक विषमता, आर्थिक शोषण और विदेशी सत्ता के फलस्वरूप हुए परिवर्तन के प्रति यह एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी।

मुंडा विद्रोह  के प्रमुख तथ्य (for MCQs) :

  • मुंडा विद्रोह आंदोलन के नायक बिरसा मुंडा को धरती आबाएवं बिरसा भगवानभी कहते हैंइनका जन्म 15 नवम्बर, 1875 को उलिहातू गांव में हुआ था
  • इस आंदोलन को ‘उलगुलान’ (महान हलचल) भी कहते हैं।
  •  यह आंदोलन राजनीतिक, धार्मिक एवं सामाजिक उद्देश्यों से प्रेरित था एवं परिणाम की दृष्टि से अंग्रेजी शासन के खिलाफ हुए न जनजातीय आंदोलनों में सर्वाधिक प्रभावशाली एवं प्रसिद्ध हुआ।
  • यह आन्दोलन मुख्यतः मुंडा जनजाति में प्रचलित सामूहिक खेती की व्यवस्था छूटकट्टी को समाप्त कर बैठ बेगारी प्रथा द्वारा उनका शोषण किये जाने के खिलाफ संगठित हुआ।
  • इस विद्रोह का प्रारंभ 1895 में हुआ।
  • 1895 में बिरसा ने स्वयं को भगवान का दूत घोषित किया।

  • बिरसा ने सशस्त्र विद्रोह की योजना बनायी थी, परन्तु 24 अगस्त, 1895 को वे मेयर्स द्वारा कैद कर लिये गये। 30 नवम्बर, 1897 को उन्हें ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया की हीरक जयंती मनाने के अवसर पर मुक्त कर दिया गया।
  • डुबारू बुरू में बिरसा ने अपने विश्वासपात्र लोगों, मंत्रियों और प्रतिनिधियों की एक सभा बुलायी, जिसमें 25 दिसम्बर, 1899 को विद्रोह करने का निर्णय लिया गया।
  • 25 दिसम्बर, 1899 को खूटी, रांची, तमाड़, बसिया, चक्रधरपुर आदि जगहों पर इनके नेतृत्व में आंदोलन हुआ।
  • इन्होंने दोन्का मुंडा को राजनीतिक एवं सोमा मुंडा को धार्मिक एवं सामाजिक मामलों का प्रमुख बनाया।
  • इनके प्रमुख सहयोगी गया मुंडा थे, जिन्हें सेनापति नियुक्त किया। जोहन मुंडा, रीढ़ा मुंडा, पंडु मुंडा, टिपरू मुंडा, डेमका मुंडा, हाथेराम मुंडा आदि को बिरसा ने सलाहकार के रूप में प्रयोग किया।
  • खूटी, तोरपा, बुंडू, कर्रा, रांची, सिसई, बसिया आदि क्षेत्रों में बिरसा सैनिक सक्रिय थे।
  • बिरसा आंदोलन का मुख्यालय खूटी था। इस आंदोलन को भी सरदारी आंदोलन माना जाता है। क्योकि सरदारी आन्दोलन के लोग मुण्डा विद्रोह में सम्मलित हो गए थे।
  • इस विद्रोह के समय रांची के उपायुक्त स्ट्रेटफील्ड थे।
  • 3 फरवरी, 1900 ई. को बंदगांव के जगमोहन सिंह के आदमी वीर सिंह महली आदि ने 500 रुपये ईनाम के लालच में बिरसा मुंडा को गिरफ्तार करवा दिया।
  • बिरसा की मृत्यु 9 जून, 1900 को रांची जेल में हैजा से हुई। बिरसा आंदोलन के परिणामस्वरूप 1902 ई. में गुमला को एवं 1903 ई. में खूटी को अनुमंडल बनाया गया।
  • 11 नवम्बर, 1908 ई. को छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम लागू किया गया।

Previous Page:खरवार/खेरवाड़ आंदोलन (1874 ई.)

Next Page :ताना भगत आंदोलन (1914-1919 ई.)