हज़ारीबाग, मानभूम और संथाल क्षेत्र के राजवंश

हजारीबाग क्षेत्र के राजवंश

दलेल सिंह (1667-1724 ई.)

विष्णु सिंह ( 1724-63 ई.)

मुकुंद सिंह

  • रामगढ़ राज्य के शासक दलेल सिंह(1667-1724 ई.) के 57 वर्षीय दीर्घ शासन काल में रामगढ़ राज्य की अभूतपूर्व प्रगति हुई। दलेल सिंह ने 1718 ई. में है राज्य के राजा मगर सिंह की हत्या कर उसके कई क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया। किन्तु मगर सिंह के पुत्र रणभस्त खाँ ने नरहत समया के जमींदार के सहयोग से 1724 ई. में रामगढ़ नरेश दलेल सिंह को पराजित कर खोये हुए प्रदेश को वापस अपने अधिकार में करने में कामयाबी हासिल की।
  • दलेल सिंह के मरणोपरांत विष्णु सिंह (1724-63 ई.) रामगढ़ नरेश बना। उसने छै राज्य के क्षेत्रों पर फिर से कब्जा कर लिया जोकि 1747 ई. तक बना रहा। उसके समय में बंगाल के नवाब अलीवर्दी खाँ ने 1740 ई. में हिदायत अली खाँ को सालाना कर वसूलने के लिए रामगढ़ भेजा। हिदायत अली खा ने रामगढ़ का सालाना कर 12,000 रुपये निर्धारित किया। 1747 ई. में भास्कर राव के नेतृत्व में रामगढ़ पर मराठों का हमला हुआ। 1751-52 में नरहत समया के जमींदार कामगार खाँ ने रामगढ़ पर हमला किया और विष्णु सिंह को समझौता करने पर विवश किया। 1763 ई. में बंगाल के नवाब मीर कासिम ने मरकत खाँ और असदुल्लाह खाँ के नेतृत्व में रामगढ़ नरेश विष्णु सिंह के विरुद्ध एक सेना भेजी, क्योंकि वह नवाब विरोधी गतिविधियों में संलिप्त था। इस सेना ने विष्णु सिंह पर आक्रमण कर उसे पराजित किया और अवैध रूप से हड़पे गये क्षेत्रों को उनके वाजिब हकदारों में बाँट दिया तथा मुआवजा वसूला।
  • विष्णु सिंह के मरणोपरांत उसका भाई मुकुद सिंह रामगढ़ की गही पर बैठा। मुकुद सिंह ने छै राज्य को रामगढ़ राज्य में मिला लिया। हज़ारीबाग क्षेत्र के अन्य राज्यों के नाम हैं-छ, केन्दी, कुंडा व खड़गडीहा। छै राज्य के राजाओं में महत्वपूर्ण नाम हैं-मगर खाँ, रणभस्त खाँ, महीपत खाँ, लाल खौँ आदि। खड़गडोहा राज्य के राजाओं में महत्वपूर्ण नाम है-शिवनाथ सिंह, मोद नारायण, गिरिवर नारायण देव आदि।

मानभूम (धनबाद) क्षेत्र के राजवंश

  • मानभूम क्षेत्र में छोटे-छोटे राजवंशों का आधिपत्य था।
  • बराभूम, नावागढ़, पाटकुम, बाघमुंडी, कतरास, झरिया, टूडी आदि क्षेत्रों के शासक छोटे-मोटे रजवाड़े व जमींदार थे।
  • अंग्रेजों के मानभूम में प्रवेश से पूर्व ये रजवाड़े व जमींदार बिहार-बंगाल के मुस्लिम शासकों के नियंत्रण से प्राय: मुक्त थे।
  • उनकी आमदनी का मुख्य जरिया कृषि न होकर लूट-पाट था।

संथाल परगना क्षेत्र के राजवंश

  • वर्ष 1707 ई. में औरंगजेब की मृत्यु के समय अजीम-उस-सान बंगाल में था। उसने उत्तराधिकार के युद्ध में अपने पिता बहादुरशाह की सहायता के लिए बंगाल से प्रस्थान किया। रास्ते में राजमहल (साहेबगंज जिला) में वह अपने पुत्र फर्रुखसियर, हरम तथा खजाना को छोड़ गया। बहादुर शाह  के गद्दी पर बैठने के बाद वह राजमहल लौट आया।
  • 1710 ई. में फर्रुखसियर अपने पिता के प्रतिनिधि के रूप में राजमहल आया।

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