झारखण्ड में परिवहन एवं संचार व्यवस्था

झारखण्ड में परिवहन एवं संचार व्यवस्था को अधिक उपयोगी बनाने की दृष्टि से सड़क मार्ग, रेल मार्ग एवं वायु मार्ग का विकास किया गया है। झारखण्ड में प्रवाहित होने वाली अधिकांश नदियाँ पहाड़ी हैं तथा यह राज्य पूर्णतः भूमि बंध (Land Locked) है, जिसके कारण यहाँ जल परिवहन की सम्भावना बहुत कम है। एकमात्र दामोदर की सहायक नदी मयूराक्षी में वर्षा ऋतु में देशी नावें चलती हैं। झारखण्ड की भौगोलिक उपस्थिति एवं स्थिति इसके सड़क एवं रेल परिवहन प्रणाली के विकास को प्रभावित करती है। स्वतंत्रता से पूर्व ब्रिटिश सरकार ने झारखण्ड क्षेत्र में खनन उद्योग एवं ब्रिटिश प्रशासनिक संविदा हेतु सड़क एवं रेल मार्ग का विकास किया था। परिणामस्वरूप झारखण्ड के अनेक क्षेत्रों में परिवहन प्रणाली का विकास नहीं हो सका, जबकि कुछ क्षेत्र परिवहन की दृष्टि से अधिक विकसित हो गए। स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार एवं तत्कालीन राज्य (बिहार) सरकार ने परिवहन प्रणाली की दृष्टि से अविकसित क्षेत्रों की तरफ समुचित ध्यान दिया।

सड़क परिवहन

राज्य में सबसे अधिक परिवहन सड़क परिवहन के द्वारा होता है। झारखण्ड की सड़कों को चार भागों में बाँटा जाता है—

मार्ग लम्बाई (किमी. में) झारखण्ड की कुल सड़क का %
राष्ट्रीय राजमार्ग* 3367 11.57
राजकीय राजमार्ग 2,711 9.32
जिला सड़कें 3,016 10.37
अन्य सड़कें 20,000 68.74
कुल 29,094 100.00

*Source : National Highway Authority of India portal

(i) राष्ट्रीय राजमार्ग-एन.एच. (National Highway-N.H.) : एक से अधिक राज्यों से होकर गुजरने वाले या एक ही राज्य से होकर गुजरने वाले किन्तु महत्वपूर्ण मार्गों को राष्ट्रीय राजमार्ग कहा जाता है। राष्ट्रीय राजमार्गों के रख-रखाव का खर्च केन्द्र सरकार वहन करती है।

सामान्यतः राज्य सरकार राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) बनाने के लिए सड़कों का चयन करती है और फिर चयनित सड़कों की सूची केन्द्र सरकार को सौंपती है राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने के आग्रह के साथ। यदि केन्द्र सरकार इस आग्रह से सहमत होती है, तो उन सड़कों को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित कर देती है।

राज्य से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल संख्या 12 है, जिसे सारणी में प्रदर्शित किया गया है—

(ii) जिला सड़कें (District Roads) : जिले के प्रमुख स्थलों को आपस में जोड़ने वाले मार्गों को जिला सड़कें कहा जाता है। जिला सड़कों की देख-रेख की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होती है। जिला प्रशासन नगरपालिका एवं जिला परिषद के जरिये इन सड़कों के निर्माण एवं मरम्मत के काम को अंजाम देता है।

(iii) अन्य सड़कें (Other Roads) : इन सड़कों के अंतर्गत ग्रामीण सड़क, निजी सड़क, विभागीय सड़क आदि आते हैं। ऐसी सड़कों में अधिकतर सड़कें ग्रामीण होती हैं जो गाँवों को जोड़ने का काम करती हैं।

रेल परिवहन झारखण्ड से गुजरने वाला सबसे पहला रेल मार्ग 1854 में बिछाया गया, जो कोलकाता से रानीगंज तक 180 किमी. लम्बा था। स्वतंत्रता से पूर्व उत्तरी छोटा नागपुर एवं दक्षिणी छोटा नागपुर में रेलवे लाइन बिछाने का कार्य क्रमश: ईस्ट इण्डियन रेलवे एवं बंगाल-नागपुर रेलवे ने किया। वर्तमान में ये दोनों कम्पनियाँ क्रमशः पूर्वी रेलवे एवं दक्षिण-पूर्व रेलवे के रूप में परिवर्तित हो चुकी हैं, जो वर्तमान में झारखण्ड में दो रेलवे परिक्षेत्र (Zones) हैं। झारखण्ड के तीन रेल मण्डल हैं-चक्रधरपुर, राँची व धनबाद। अक्टूबर, 2002 से कार्यरत नवगठित रेल क्षेत्र पूर्व मध्य रेलवे द्वारा वर्तमान में रेल विस्तारीकरण, विद्युतीकरण एवं दोहरीकरण का कार्य संचालित किया जा रहा है। पूर्व मध्य रेलवे का मुख्यालय हाजीपुर (बिहार) में स्थित है। झारखण्ड में रेल पथों का सबसे घना विस्तार दामोदर घाटी और स्वर्णरेखा घाटी में पाया जाता है, जबकि पलामू का पाट क्षेत्र ऊपरी दामोदर घाटी क्षेत्र, हजारीबाग का ऊँचा-नीचा पठार और राजमहल पहाड़ी रेल-रहित क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं।

झारखण्ड में निम्नलिखित नई रेल परियोजनाओं पर कार्य प्रारम्भ किया गया है (i) कोडरमा- गिरिडीह, (ii) कोडरमा-हजारीबाग-राँची, (iii) देवघर-दुमका-रामपुरहाट, (iv) लोहरदगा-राँची (टोरी तक विस्तार), (v) कोडरमा-सिलैया। राज्य में सुविकसित रेलवे प्रणाली के अंतर्गत राँची, बोकारो, मूरी, धनबाद, घाटशिला और जमशेदपुर प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं।

वर्ष 2019 तक झारखण्ड में कुल रेलमार्गों की लम्बाई 2571 कि. मी. थी। जमशेदपुर में कंटेनर टर्मिनल का डिपो है, जबकि राँची में केंद्रीय रेलवे विद्युतीकरण संगठन की शाखा स्थित है।

वायु परिवहन आर्थिक पिछड़ेपन के कारण झारखण्ड आज भी वायु परिवहन की दृष्टि से पिछड़ा हुआ है। झारखण्ड राज्य का प्रमुख हवाई अड्डा राँची हवाई अड्डा (बिरसा मुण्डा हवाई अड्डा) है। वर्ष 1941 में निर्मित यह हवाई अड्डा राष्ट्रीय श्रेणी का हवाई अड्डा है। जमशेदपुर के समीप चाकुलिया में लघु श्रेणी का हवाई अड्डा है। राँची और जमशेदपुर में उड्डयन और ग्लाइडिंग की सुविधा उपलब्ध है। हजारीबाग तथा

बोकारो में भी दो लघु श्रेणी के हवाई अड्डे स्थापित किए गए हैं। झारखण्ड में कोई भी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा स्थापित नहीं है। राँची वायुमार्ग द्वारा दिल्ली, पटना और मुम्बई से जुड़ा है। जमशेदपुर, बोकारो, गिरिडीह, देवघर, हजारीबाग, डाल्टेनगंज और नोआमुंडी में हवाई पट्टियाँ हैं। देवघर में हवाई अड्डा (अंतर्राज्यीय) बनाने के लिए झारखण्ड सरकार और भारतीय विमान प्राधिकरण ने हस्ताक्षर किए हैं।

जल परिवहन

झारखण्ड में स्वर्णरेखा नदी को जल परिवहन योग्य बनाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि अंतर्देशीय जल परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। झारखण्ड सरकार साहेबगंज और राजमहल में गंगा नदी में जल परिवहन की आधारभूत संरचनाओं को उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है, ताकि समुद्री बंदरगाह मार्ग तक पहुँच को सुगम बनाया जा सके। दामोदर स्वर्णरेखा और बराकर नदियों के किनारों पर कहीं-कहीं स्थानीय लोगों में प्रचलित जल परिवहन की भी व्यवस्था है। इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) से हुगली (पश्चिम बंगाल) तक जाने वाला राष्ट्रीय जलमार्ग झारखण्ड में साहेबगंज से गुजरता है तथा इस जलमार्ग के घाटों में साहेबगंज घाट भी शामिल है।

संचार 2 फरवरी, 2001 को राष्ट्रपति की मंजूरी के पश्चात् भारतीय डाक विभाग ने झारखण्ड डाक सर्कल का निर्माण किया है। झारखण्ड सर्कल के निर्माण के बाद भी यह बिहार डाक सर्कल के अन्तर्गत कार्यरत रहेगा। पिनकोड प्रणाली के अंतर्गत पूरे भारत को आठ विशाल क्षेत्रों (Zones) में विभाजित किया गया है। पिनकोड का प्रथम अंक विशेष क्षेत्र को दर्शाने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। पिनकोड प्रणाली में झारखण्ड के लिए प्रथम अंक के रूप में 8 का उपयोग किया जाता है।

आकाशवाणी तथा दूरदर्शन झारखण्ड में प्रसारण का मुख्य साधन आकाशवाणी (Radio) केन्द्र है, जो स्थानीय एवं प्रादेशिक कार्यक्रमों से जनता को अवगत कराते हैं। प्रदेश का मुख्य आकाशवाणी केन्द्र (उच्च शक्ति ट्रांसमिशन) राँची है। इसके अतिरिक्त चाईबासा, जमशेदपुर, धनबाद, डाल्टेनगंज और हजारीबाग में भी आकाशवाणी केन्द्र (निम्न शक्ति ट्रांसमिशन) है।

झारखण्ड में दूरदर्शन केन्द्र की स्थापना सर्वप्रथम राँची में की गयी। छठी पंचवर्षीय योजना में स्थापित इस केन्द्र की परिधि व्यापक है। 1983 में राष्ट्रीय उपग्रह इन्सैट – 1बी (INSAT-1B) के प्रक्षेपित किए जाने से दूरदर्शन कार्यक्रम के सीधे प्रसारण की सुविधा के प्रसार के लिए 1984 में धनबाद, देवघर, दुमका, बोकारो, जमशेदपुर और हजारीबाग में लघु शक्ति वाले ट्रांसमीटर केंद्रों को स्थापित किया गया। डाल्टेनगंज में उच्च शक्ति ट्रांसमीटर लगाया गया है।

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