झारखण्ड : कृषि एवं सिंचाई

ठारी क्षेत्र होने के कारण अन्य प्रदेशों की तुलना में झारखण्ड में कृषि-योग्य भूमि बहुत ही कम है। यहाँ मात्र 23% भूमि ही कृषि के लायक है। सिंचाई के साधनों की कमी है। पठारी इलाका होने के कारण तालाब एवं कुएँ खोदने में कठिनाई होती है। चापाकल भी बहुत कारगर नहीं हो पाते, क्योंकि जल-स्तर बहुत नीचे है। अतएव यहाँ की कृषि वर्षा पर आधारित है। झारखण्ड के खेतों में काम करना आसान नहीं हैं। ऊबड़-खाबड़ खेत, छोटे-छोटे जोत, जमीन बंजर—इन सबके कारण कृषि के उन्नत तकनीकों का उपयोग नहीं हो पाता। कुछ मिलाकर झारखण्ड में कृषि का समुचित विकास एक बड़ी चुनौती है।

फसल के प्रकार

  1. खरीफ : जून/जूलाई से लेकर सितम्बर/अक्टूबर माह तक
    • फसल : धान मक्का ज्वार-बाजरा, मूंग, मूगफली, गन्ना
  2. रबी : अक्टूबर/नवम्बर से लेकर मार्च/अप्रैल माह तक
    • फसल : गेहूँ जौ, चना, सरसों, तिलहन
  3. जायद : अप्रैल/मई से लेकर जून/जूलाई माह तक
    • फसल : हरी सब्जियाँ खीरा, तरबूज नाशपत्ति, भिन्डी

मौसम के आधार पर फसल मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं—खरीफ फसल (Kharif Crops) व रबी फसल (Rabi Crops) । इन दो मुख्य फसलों के अलावा फसलों का एक और प्रकार होता है, जिसे जायद या गरमा फसल (Jayad or Garma Crops) कहते हैं।

  1. खरीफ फसलें/बरसाती मौसम की फसल : ये फसलें मानसून के आगमन के समय (जून/जुलाई) में बोई जाती है और मानसून की समाप्ति पर (सितम्बर/अक्टूबर) काटी जाती है। खरीफ फसल को झारखण्ड में दो फसलों— भदई (Bhadai) व अगहई (Agahani) में बांटा जाता है। भदई फसल मई/जून (वैशाख/जेठ) में बोई जाती है तथा अगस्त/सितम्बर (भादो) में काटी जाती है। इसी तरह अगहनी फसल जून (जेठ/आषाढ़) में बोई जाती है और दिसंबर (अगहन) में काटी जाती है। झारखण्ड की खेती में अगहनी फसल का सर्वोपरि स्थान है, क्योंकि कुल कृषिगत भूमि के 69.75% भाग में अगहनी फसल की खेती की जाती है। अगहनी फसल के बाद भदई फसल का स्थान आता है, जो कुल कृषिगत भूमि के 20.26% भाग में की जाती है। खरीफ फसलों में धान का सर्वप्रमुख स्थान है। अन्य प्रमुख खरीफ फसलें हैं—मक्का, ज्वार, बाजरा, मूंग, मूंगफली, गन्ना आदि।
  2. रबी फसलें/ठंडे मौसम की फसल : रबी फसलें अक्टूबर/नवम्बर में बोयी जाती हैं और मार्च (वैशाख) में काटी जाती हैं। रबी फसल को वैशाखी/ वैशाख फसल भी कहा जाता है। झारखण्ड के कुल कृषिगत भूमि के 9.20% भाग में रबी फसल की जाती है। रबी फसलों में गेहूँ का सर्वप्रमुख स्थान है। अन्य प्रमुख रबी फसलें हैं—जौ, चना, तिलहन आदि।
  3. जायद/गरमा फसलें : ये अपेक्षाकृत छोटे मौसम की फसलें हैं। ये फसलें मार्च/अप्रैल में बोई जाती हैं और जून/जुलाई में काटी जाती हैं। इस फसल की खेती उन क्षेत्रों में होती है, जहाँ सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है या आर्द्र भूमि वाले क्षेत्र हैं। झारखण्ड में कुल कृषिगत भूमि के केवल 0.73% भाग में जायद/गरमा फसल की जाती है। जायद/गरमा फसलों में हरी सब्जियों का विशेष स्थान है।

झारखण्ड का कृषि प्रदेश

कृषि प्रदेश सम्मिलित जिला टिप्पणी
1. उत्तरी कोयल घाटी के कृषि प्रदेश गढ़वा, पलामू, लातेहार व चतरा का पश्चिमी भाग धान इस क्षेत्र की प्रमुख फसल है। अन्य फसल चना, मक्का, अरहर, तिलहन, गन्ना आदि
2. हजारीबाग पठार के कृषि प्रदेश चतरा का अधिकांश भाग, हजारीबाग, गिरिडीह तथा कोडरमा कृषि क्रियाकलाप सीमित। धान, मक्का, व रागी फसल उगाई जाती है
3. राजमहल की पहाड़ी व उसके सीमावर्ती दक्षिणी से क्षेत्रों के कृषि प्रदेश साहेबगंज, दक्षिणी पाकुड़, गोड्डा,दुमका, देवघर, जामताड़ा औसत वार्षिक वर्षा 100-130 सेमी., धान की खेती प्रमुखता
4. दामोदर घाटी का कृषि प्रदेश पश्चिमी में लातेहार से लेकर पूर्व में धनबाद तक, जिसमें पूर्वी लातेहार, दक्षिणी चतरा, दक्षिणी हजारीबाग, बोकारो व धनबाद संपूर्ण क्षेत्र में गोंडवाना क्रम की चट्टानों की प्रधानता (धान, मक्का, तिलहन और दलहन प्रमुख फसलें (कोयला खनन, औद्योगिकीकरण और शहरीकरण का विस्तार
5. राँची पठार का कृषि प्रदेश राँची, पूर्वी लोहरदगा, गुमला व सिमडेगा औसत वर्षा 120-130 सेमी. नकदी फसलों विशेषकर सब्जी की खेती में विस्तार, दोन भूमि में धान की खेती एवं टांड भूमि में रागी, तिलहन, दलहन व फल की खेती
6. निचली स्वर्णरेखा घाटी के कृषि प्रदेश पूर्वी सिंहभूम व सारयकेला का पूर्वी भाग खनन का विकास, औद्योगीकरण व शहरीकरण का विकास (मुख्य फसल धान व सब्जियां, बहुफसली खेती का विकास)
7. चाइबासा का मैदान व समीपवर्ती उच्च भूमि का कृषि प्रदेश पश्चिमी सिंहभूम का संपूर्ण भाग व पूर्वी सरायकेला औसत वर्षा 100-140 सेमी. मिट्टी धात्विक गुणों से परिपूर्ण, धान, मक्का व चना की खेती प्रमुखता से।
8. उत्तरी-पूर्वी सीमांत का कृषि प्रदेश उत्तरी गोड्डा, साहिबगंज का उत्तरी-पूर्वी भाग  व उत्तरी-पूर्वी औसत वर्षा 140-160 सेमी., धान, गेहूं, मक्का, चना व दलहन प्रमुख फसलें, कृषि की दृष्टि से राज्य का एकमात्र विकसित क्षेत्र, बहुफसली व्यवस्था का विस्तार

सिंचाई परियोजनाएं

परियोजना जिला आरंभ होने का वर्ष
वृहद सिंचाई परियोजना (10,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था)
1. स्वर्णरेखा परियोजना सिंहभूम पांचवीं पंचवर्षीय योजना
2. कोनार बैराज परियोजना बोकारो/हजारीबाग पांचवीं पंचवर्षीय योजना
3. उत्तरी कोयल परियोजना पलामू पांचवीं पंचवर्षीय योजना
4. गुमानी जलाशय परियोजना दुमका सातवीं पंचवर्षीय योजना
5. पुनासो जलाशय परियोजना दुमका सातवीं पंचवर्षीय योजना
6. औरंजा जलाशय परियोजना पलामू सातर्वी पंचवर्षीय योजना
7. अजय बराज परियोजना देवघर
8. काँची वृहत सिंचाई परियोजना राँची
मध्यम सिंचाई परियोजना (2,000 हेक्टेयर से अधिक किन्तु 10,000 हेक्टेयर से कम क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था)
1. तोरई दुमका 1978
2. सकरी गली पम्प योजना साहेबगंज 1978
3. कंस जलाशय परियोजना राँची 1979
4. बटाने जलाशय परियोजना पलामू 1981
5. कतरी जलाशय परियोजना गुमला 1981
6. सोनुआ जलाशय परियोजना सिंहभूम 1982
7. पतरातू जलाशय परियोजना राँची 1982
8. केशो जलाशय परियोजना हजारीबाग 1982
9. सलइया जलाशय परियोजना हजारीबाग 1982
10. सतपोटका जलाशय परियोजना सिंहभूम 1982
11. नकटी जलाशय परियोजना सिंहभूम 1983
12. रामरेखा जलाशय परियोजना गुमला 1983
13. भैरवा जलाशय परियोजना हजारीबाग 1984
14. पंचखेरो जलाशय परियोजना हजारीबाग 1984
15. वासुकी सिंचाई सह जलापूर्ति परियोजना राँची 1984
16. धान सिंह टोली जलाशय परियोजना गुमला 1986
17. सुरंगी जलाशय परियोजना सिंहभूम 1987
18. अपर शंख जलाशय परियोजना गुमला 1987
19. कसजोर जलाशय परियोजना गुमला 1989

लघु सिंचाई परियोजना (2,000 हेक्टेयर से कम क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था) माइक्रोलिफ्ट एवं उद्वह सिंचाई योजना पहाड़ी क्षेत्रों में (उद्वह सिंचाई निगम लिमिटेड के माध्यम से विभिन्न लघु सिंचाई परियोजनाएं चलाई जा रही हैं।)

झारखण्ड में सिंचाई की स्थिति

जिला कुल कृषि भूमि में सिंचाई का %
गोड्डा 14.21
दुमका 9.47
साहेबगंज (पाकुड़) 3.86
देवघर 14.22
धनबाद (बोकारो) 2.08
हजारीबाग (चतरा) 10.51
गिरिडीह 6.99
पलामू (गढ़वा) 24.25
राँची 6.12
लोहरदगा 8.87
गुमला 2.45
पू. सिंहभूम 5.0
प. सिंहभूम 4.0

झारखण्ड में सिंचाई के स्रोत

सिंचाई के साधन सिंचाई का प्रतिशत (%) प्रमुख जिला
नहर 17.53

 

सिंहभूम व सरायकेला खरसावां
तालाब 19.07 देवघर
ट्यूबवेल/नलकूप 8.25 लोहरदगा
कुंआ 29.38 गुमला व गिरिडीह
अन्य 25.77

प्रमुख फसलें

झारखण्ड की प्रमुख फसलें इस प्रकार हैं

  1. धान (Paddy) : यह राज्य की सर्वप्रमुख खाद्य फसल (cereals crops) है। झारखण्ड में धान का सबसे बड़ा क्षेत्र सिंहभूम, राँची, गुमला एवं दुमका है, जहाँ झारखण्ड के कुल धान के लगभग 50% का उत्पादन होता है। इसके अलावा धान की खेती हजारीबाग, पलामू, गढ़वा, धनबाद, गोड्डा, गिरिडीह आदि में होती है।
  2. मक्का (Maize) : राज्य में उत्पादन की दृष्टि से इस फसल का स्थान दूसरा है। झारखण्ड में मक्का उत्पादन की दृष्टि से पलामू का प्रथम स्थान है। – इसके बाद हजारीबाग, गिरिडीह एवं साहेबगंज का स्थान आता है।
  3. गेहूँ (Wheat) : यह राज्य की तीसरी प्रमुख फसल है। इसका सर्वाधिक उत्पादन पलामू जिला में होता है जबकि दूसरे स्थान पर हजारीबाग एवं तीसरे स्थान पर गोड्डा है।
  4. गन्ना (Sugar Cane) : यह राज्य की एक नकदी फसल (Cash Crop) है। इसके प्रमुख उत्पादक जिले हैं—हजारीबाग, पलामू, दुमका, गोड्डा, साहेबगंज, गिरिडीह आदि।
  5. जौ (Barley) : यह भारत की प्राचीनतम फसल है। इसके प्रमुख उत्पादक जिले हैं—पलामू, साहेबगंज, हजारीबाग, सिंहभूम, गोड्डा आदि।
  6. मडुआ (Madua) : यह कम समय में तैयार होने वाली फसल है। इसकी बुआई अप्रैल/मई में की जाती है और कटाई जन/जलाई में की जाती है। इसके प्रमुख उत्पादक जिले हैं—राँची, हजारीबाग, गिरिडीह आदि।

इसके अलावा झारखण्ड में ज्वार-बाजरा, दलहन-तिलहन आदि की खेती की जाती है। ज्वार-बाजरा (Jowar-Millet) के प्रमुख उत्पादक जिले हैं—हजारीबाग, राँची, सिंहभूम, संथाल परगना आदि। दलहन-तिलहन (Pulse-Oil seed Crops) का सर्वाधिक उत्पादन पलामू प्रमण्डल में होता है। साथ ही, झारखण्ड में सिंचाई करके सब्जियाँ उपजाई जाती हैं। राँची से सब्जियाँ पश्चिमी बंगाल एवं अन्य राज्यों में बेची जाती हैं।

झारखण्ड की प्रमुख फसलें और उनके उत्पादन क्षेत्र
फसल उत्पादन क्षेत्र
मक्का छोटानागपुर का पठारी क्षेत्र
तिलहन छोटानागपुर क्षेत्र का पठारी भाग
अरहर पलामू
मरूआ राँची, हजारीबाग, पलामू
बाजरा हजारीबाग, राँची, सिंहभूम, संथाल परगना
जौ पलामू
गन्ना पलामू, हजारीबाग, संथाल परगना
राई/सरसों पलामू
तिल पलामू, हजारीबाग, संथाल परगना
दलहन पलामू
मसूर संथाल परगना
आलू हजारीबाग
मेस्ता संथाल परगना, राँची, हजारीबाग, सिंहभूम

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