झारखण्ड का अपवाह तंत्र

झारखण्ड का अपवाह तंत्र

  1. दामोदर नदी घाटी

  2. उत्तर-पूर्वी अपवाह तंत्र

  3. स्वर्णरेखा नदी-घटी

  4. दक्षिण कोयल नदी घाटी

  5. सोन तथा उत्तरी कोयल नदी घाटी

झारखण्ड की प्रवाह प्रणाली को दो वर्गों यथा (1) दक्षिणी प्रवाह प्रणाली, (2) अंततः गंगा में मिलने वाली नदियां; में विभाजित किया जा सकता है। स्वर्णरेखा, शंख, दक्षिणी कोयल आदि को पहले वर्ग में तथा दामोदर व उत्तरी कोयल को दूसरे वर्ग में शामिल किया जाता है। इन दोनों के मध्य मिलने वाला जल विभाजन झारखण्ड के लगभग मध्यवर्ती भाग में पूर्व से पश्चिम की दिशा लिए हुए विस्तृत है। छोटानागपुर के पठारी क्षेत्र में अनेक नदियों का प्रवाह है, जो भिन्न-भिन्न भागों में अपना अस्तित्व बनाए हुए है। उदाहरणार्थ दामोदर तथा इसकी सहायक नदियाँ हजारीबाग और राँची स्थित धंसान घाटी में, उत्तरी कोयल नदी इस पठार के उत्तर-पश्चिम भाग में, दक्षिण कोयल नदी दक्षिणी-पश्चिमी भाग में तथा स्वर्ण रेखा नदी दक्षिणी-पूर्वी भाग में अपने अपवाह तंत्र का विस्तार करती है।

इन नदियों के अतिरिक्त यहाँ बराकर, अजय, फल्गु, संकरी इत्यादि हैं। इस पठार के उत्तरी भाग से निकल कर उत्तर की ओर प्रवाहित होने वाली नदियों में फल्गु, रांकरी, मोरहर हैं, जो गंगा नदी में मिलती हैं। इन नदियों की घाटियां लगभग चौरस हैं, परन्तु कांट-छांट की प्रवृत्ति अभी भी जारी है। इनके किनारे अभी भी खड़े ढाल हैं, जिससे अनेक जगह जलप्रपात, संकीर्ण घाटी आदि का निर्माण हुआ है। इन नदियों में से अधिकांश का प्रवाह बरसाती जल पर निर्भर है, क्योंकि मॉनसून काल में ही निरंतर जल का प्रवाह इनमें देखने को मिलता है। छोटानागपुर पठारी भाग ही यहाँ के नदियों का उद्गम स्थल है, जिन्हें अपवाह तंत्र के आधार पर मुख्यत: पांच भागों में बांटा गया है

1. दामोदर नदी घाटी (The Damodar River Basin):

इस नदी का प्रवाह क्षेत्र राँची का पठार तथा हजारीबाग पठार के बीच स्थित है। यह भ्रंशित द्रोणी का उदाहरण है। यह पश्चिम से पूर्व दिशा में प्रवाहित होती है। इसकी मुख्य सहायक नदियां बराकर, कोनार, गोबाई इत्यादि हैं। इस नदी का प्रवाह क्षेत्र लगभग छोटानागपुर पठार के एक तिहाई भाग में है। इस नदी की प्रमुख सहायक नदी बराकर लगभग स्वतंत्र रूप से घाटी का निर्माण करती है और दामोदर नदी से अधिक ऊँची भूमि में विभक्त हो जाती है।

2. उत्तर-पूर्वी अपवाह तंत्र (The North Eastern Drainage Basin):

छोटानागपुर के उत्तर पूर्वी भाग में अनेक नदियों का प्रवाह क्षेत्र है। इसमें अजय, मोर, ब्राह्मणी, गुमानी प्रमुख हैं। ये राजमहल पहाड़ी के पूर्वी भाग को सिंचित कर गंगा में मिल जाती हैं।

3. स्वर्णरेखा नदी घाटी (The Suvarnrekha River Basin) :

इस नदी घाटी की शुरुआत राँची पठार के मध्य भाग में पिस्का-नगड़ी से होती है और दक्षिण पूर्व दिशा में प्रवाहित होती है। इस नदी की सबसे प्रमुख शाखा खरकाई हैं, जो जमशेदपुर के निकट मिलती है।

4. दक्षिण कोयल नदी घाटी (The South Koel River Basin) :

यह नदी राँची पठार के दक्षिण-पश्चिमी भाग में प्रवाहित होती है। इसके प्रवाह क्षेत्र में पत प्रदेश का दक्षिणी हिस्सा शामिल है, जहाँ से अनेक छोटी-छोटी नदियाँ आकर इसमें मिलती हैं। इनमें सबसे प्रमुख सहायक नदी शंख है।

5. सोन तथा उत्तरी कोयल नदी घाटी (The Sone & The Koel River Basin) :

इन नदियों का प्रवाह क्षेत्र छोटानागपुर पठार के उत्तर पश्चिमी भाग में, खासकर पलामू जिला में है। उत्तरी कोयल नदी पत प्रदेश का पश्चिमी हिस्सा सिंचित करती है। इस नदी को अमानत, औरंगा, गोगरा तथा मैला नदियों से भी जल प्राप्त होता है। यह पलामू जिला के लगभग मध्य भाग से गुजर कर सोन नदी में मिलती है और कैमूर के पहाड़ी भाग को छोटानागपुर के पठारी भाग से विभक्त करती है।

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