झारखण्ड की जलवायु

छोटानागपुर का पठारी भाग मानसून जलवायु की विशेषताओं से युक्त है। उष्णकटिबंधीय अवस्थिति एवं मानसूनी हवाओं के कारण झारखण्ड की जलवायु उष्णकटिबंधीय मानसूनी प्रकार की है। यहा भी वर्षा की अनिश्चितता, असमान वितरण, तापमान की सामयिक विषमताएं आदि दृष्टिगोचर होती है। यहाँ ग्रीष्म ऋतु, शरद ऋतु तथा वर्षा ऋतु में काफी अंतर रहता है।

ग्रीष्म ऋतु (मार्च-मध्य जून) : यहाँ ग्रीष्म ऋतु का आरंभ मार्च महीने में होता है, तब तापमान तेजी से बढ़ने लगता है और मई महीने में औसत तापमान बढ़कर अधिकतम हो जाता है। ग्रीष्म ऋतु में मासिक औसत तापमान 29°C से 45°C के मध्य रहता है। राज्य का सर्वाधिक गर्म महीना मई है। मई में राज्य का अधिकतम तापमान 40°C या उसके पार चला जाता है। राज्य का सबसे गर्म स्थल जमशेदपुर है। उत्तर पूर्वी भाग में निम्न वायुदाब का क्षेत्र बन जाता है। परिणामस्वरूप पश्चिम से पूर्व दिशा में हवा प्रवाहित होने लगती है। इस समय थोड़ी बहुत वर्षा पश्चिम बंगाल की खाड़ी से आने वाली हवाओं (Norwester) से होती है।

झारखण्ड में विभिन्न स्थानों का तापमान स्थान

ग्रीष्मकालीन तापमान (°C)

जमशेदपुर    45.0

धनबाद        44.6

डाल्टेनगंज   44.5

राँची            41.0

हजारीबाग    33.1

वर्षा ऋतु (मध्य जून-अक्टूबर) : ग्रीष्म ऋतु के बाद वर्षा ऋतु का आरंभ होता है, जो अक्टूबर तक रहता है। इस समय तापमान धीरे-धीरे घटने लगता है। इस समय यहाँ निम्न वायुदाब का क्षेत्र विकसित होता है, जिससे यहाँ वर्षा होती है। इस समय वर्ष की 80 प्रतिशत वर्षा होती है। औसतन वर्षा 130 से.मी. से 140 से.मी. तक होती है। वर्षा के वितरण प्रारूप में दक्षिण से उत्तर तथा पूर्व से पश्चिम की ओर घटने की प्रवृत्ति पायी जाती है लेकिन स्थानीय प्रभाव के चलते थोड़ी-बहुत वर्षा की मात्रा में भिन्नता पाई जाती है। वर्षा की दृष्टि से झारखण्ड मध्यम वर्षा का प्रदेश है। झारखण्ड में सबसे अधिक वर्षा हजारीबाग जिले में होती है, जबकि लातेहार जिले का नेतरहाट सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान है। यहाँ कभी-कभी 200 से.मी. तक वर्षा हो जाती है। इसके विपरीत चाईबासा के मैदानी भाग में सबसे कम वर्षा होती है।

शीत ऋतु (नवम्बर-फरवरी) : वर्षा ऋतु के उपरांत शीत ऋतु की शुरुआत होती है। यह नवम्बर के महीने से आरंभ होकर फरवरी तक रहती है। इस समय यह क्षेत्र विरुद्ध चक्रवात के प्रभाव में रहता है। यहाँ उच्च वायुदाब का क्षेत्र बन जाता है और हवाएं उत्तर से पश्चिम व दक्षिण पूर्व की ओर बहने लगती हैं परन्तु इन हवाओं के बहाव का नियंत्रण स्थानीय स्थलाकृति से होता है। इस समय तापमान 16°C से 18°C तक रहता है और आसमान लगभग साफ रहता है। दिन हल्का गर्म होता है और रातें काफी ठंडी रहती हैं। राज्य का सर्वाधिक ठंडा स्थान नेतरहाट है, जहाँ जनवरी माह में तापमान कभी-कभी 7.5°C से भी नीचे चला जाता है।

झारखण्ड को 7 जलवायु प्रदेशों (Climatic Regions/Zones) में बाँटा जाता है— 1.उत्तरी व उत्तरी-पश्चिमी क्षेत्र (महाद्वीपीय प्रकार), 2. मध्यवर्ती क्षेत्र (उपमहाद्वीपीय प्रकार), 3. पूर्वी संथाल परगना क्षेत्र (डेल्टा प्रकार), 4. पूर्वी सिंहभूम क्षेत्र (सागर-प्रभावित प्रकार), 5. पश्चिमी सिंहभूम का पश्चिमी क्षेत्र (आर्द्र वर्षा प्रकार), 6. राँची-हजारीबाग पठार क्षेत्र (तीव्र एवं सुखद प्रकार) एवं 7. पाट क्षेत्र (शीत वर्षा प्रकार)। 

  1. उत्तरी व उत्तरी-पश्चिमी क्षेत्र (महाद्वीपीय प्रकार) इस जलवायु क्षेत्र का विस्तार पलामू, गढ़वा, चतरा व हजारीबाग जिले के मध्यवर्ती भाग, गिरिडीह जिले के मध्यवर्ती भाग एवं संथाल परगना क्षेत्र के पश्चिमी भागों (देवघर, उत्तरी दुमका, गोड्डा) में है। इस जलवायु क्षेत्र की विशिष्टता है, इसका अतिरेक स्वभाव का होना अर्थात् जाड़े के मौसम में अत्यधिक जाड़ा एवं गर्मी के मौसम में अत्यधिक गर्मी पड़ना। इस क्षेत्र में कुल औसत वार्षिक वर्षा दक्षिणी भाग में 127 सेंटीमीटर तथा दक्षिण-पूर्व में 114 सेंटीमीटर से कम प्राप्त होती है। उत्तर तथा उत्तर-पश्चिम में इससे भी कम वर्षा प्राप्त होती है।
  2. मध्यवर्ती क्षेत्र (उपमहाद्वीपीय प्रकार) इस जलवायु क्षेत्र का विस्तार पूर्वी लातेहार, दक्षिणी चतरा, दक्षिणी हजारीबाग, बोकारो, धनबाद, जामताड़ा एवं दक्षिणी-पश्चिमी दुमका में है। यह क्षेत्र लगभग महाद्वीपीय प्रकार का ही है, किन्तु तापमान में अपेक्षाकृत कमी एवं वर्षा में अपेक्षाकृत अधिकता के कारण इसे एक पृथक् प्रकार उपमहाद्वीपीय प्रकार का दर्जा दिया गया है। इस क्षेत्र में कुल औसत वार्षिक वर्षा 127 सेंटीमीटर से 165 सेंटीमीटर के बीच होती है।
  3. पूर्वी संथाल परगना क्षेत्र (डेल्टा प्रकार) इस जलवायु क्षेत्र का विस्तार साहेबगंज, पाकुड़ जिला क्षेत्रों में है, जो राजमहल पहाड़ी के पूर्वी ढाल का क्षेत्र है। इस जलवायु क्षेत्र की समानता बंगाल की जलवायु से की जा सकती है। यह नार्वेस्टर (nor’ wester) का क्षेत्र है। ग्रीष्म काल में नार्वेस्टर से इस क्षेत्र में 13.5 सेंटीमीटर वर्षा होती है। इस क्षेत्र में कुल औसत वार्षिक वर्षा 152.5 सेंटीमीटर होती है।
  4. पूर्वी सिंहभूम क्षेत्र (सागर-प्रभावित प्रकार) इस जलवायु क्षेत्र का विस्तार पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसवां जिला एवं पश्चिमी सिंहभूम जिला के पूर्वी क्षेत्रों में है। इस जलवायु क्षेत्र का उत्तरी हिस्सा सागर से 200 किमी. की दूरी पर है, जबकि दक्षिणी हिस्सा सागर से 100 किमी. की दूरी पर है। यह जलवायु क्षेत्र नार्वेस्टर के प्रभाव क्षेत्र में आता है, इसलिए इस क्षेत्र में नार्वेस्टर के प्रभाव से होनेवाली मौसमी घटनाएं घटित होती हैं। मॉनसून पूर्व यहाँ अक्सर तड़ित झंझा देखा जाता है। प्रतिवर्ष औसतन 71 तड़ित झंझा आते हैं, जिनमें 10 ओलावृष्टि करते हैं। यह जलवायु क्षेत्र ग्रीष्म काल में सर्वाधिक वर्षा प्राप्त करने वाला जलवायु क्षेत्र है। इस जलवायु क्षेत्र में कुल औसत वार्षिक वर्षा 140 सेंटीमीटर से 152 सेंटीमीटर के बीच होती है।
  5. पश्चिमी सिंहभूम का पश्चिमी क्षेत्र (आर्द्र वर्षा प्रकार) इस जलवायु क्षेत्र का विस्तार सिमडेगा एवं पश्चिमी सिंहभूम के मध्य एवं पश्चिमी भाग में है। यहाँ मानसून की दोनों शाखाओं के द्वारा वर्षा होती है। इस क्षेत्र में कुल औसत वार्षिक वर्षा 152.5 सेंटीमीटर से अधिक होती है। 
  6. राँची-हजारीबाग पठार क्षेत्र (तीव्र एवं सुखद प्रकार) इस जलवायु क्षेत्र का विस्तार राँची-हजारीबाग पठारी क्षेत्र में है। इस जलवायु क्षेत्र की जलवायु तीव्र एवं सुखद प्रकार की है, जो झारखण्ड में कहीं और नहीं मिलती। इस प्रकार की जलवायु के निर्माण में इस भू-भाग की ऊँचाई की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऊँचाई के कारण ही चारों ओर की अपेक्षा यहाँ तापमान कम रहता है। राँची में औसतन वार्षिक वर्षा 151.5 सेंटीमीटर एवं हजारीबाग में औसतन वार्षिक वर्षा 148.5 सेंटीमीटर होती है।
  7. पाट क्षेत्र (शीत वर्षा प्रकार) इस जलवायु क्षेत्र का विस्तार लोहरदगा एवं गुमला के अधिकांश में है। इस क्षेत्र की जलवायु राँची पठार की तरह ही है, लेकिन यह राँची पठार की तुलना में अधिक तीव्र एवं ठंडी है, इस जलवायु क्षेत्र की मुख्य  विशेषताएँ हैं—अधिक वर्षा का होना, अधिक बादलों का ताना, ग्रीष्म में शीतल बना रहना एवं शीत ऋतु में शीतलतम हो जाना। शीत ऋतु में तापमान हिमांक (freezing point) से भी नीचे चला जाता है। यह जलवायु क्षेत्र झारखण्ड का सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र है। यह वर्षा मानसून के अतिरिक्त शीत ऋतु में भी होती है। इस जलवायु क्षेत्र के 1000 मीटर से अधिक ऊँचे भू-भाग में 203 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा होती है।

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