देशी रियासतों का एकीकरण

केंद्रशासित प्रदेशों एवं राज्यों का उद्भव

देशी रियासतों का एकीकरण

देशी रियासतों का एकीकरण आजादी के समय भारत में राजनीतिक इकाईयों की दो श्रेणियां थीं-ब्रिटिश प्रांत (ब्रिटिश सरकार के शासन के अधीन) और देशी रियासतें (राजा के शासन के अधीन लेकिन ब्रिटिश राजशाही से संबद्ध)। भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम (1947) के अंतर्गत दो स्वतंत्र एवं पृथक् प्रभुत्व वाले देश भारत और पाकिस्तान का निर्माण किया गया और देशी रियासतों को तीन विकल्प दिए गएभारत में शामिल हों, पाकिस्तान में शामिल हों या स्वतंत्र रहे। 552 देशी रियासतें, भारत की भौगोलिक सीमा में थीं। 549 भारत में शामिल हो गयीं और बची हुयी तीन रियासतों (हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर) ने भारत में शामिल होने से इंकार कर दिया। यद्यपि कुछ समय बाद इन्हें भी भारत में मिला लिया गया हैदराबाद को पुलिस कार्यवाही के द्वारा, जूनागढ़ को जनमत के द्वारा एवं कश्मीर को विलय पत्र के द्वारा भारत में शामिल कर लिया गया।

1950 में संविधान ने भारतीय संघ के राज्यों को चार प्रकार से वर्गीकृत किया-भाग क, भाग ख, भाग ग एवं भाग घ । ये सभी संख्या में 29 थे। भाग क में वे राज्य थे, जहां ब्रिटिश भारत में गर्वनर का शासन था। भाग ख में 9 राज्य विधानमंडल के साथ शाही शासन, भाग ग में ब्रिटिश भारत के मुख्य आयुक्त का शासन एवं कुछ में शाही शासन था। भाग ग में राज्य (कुल 10) का केंद्रीकृत प्रशासन था। अंडमान एवं निकोबार द्वीप को अकेले भाग घ राज्य में रखा गया था।

Previous Page:बंगलादेश के साथ सीमाओं का हस्तांतरण

Next Page :धर आयोग और जेवीपी समिति