फजल अली आयोग

आंध्र प्रदेश के निर्माण से अन्य क्षेत्रों से भी भाषा के आधार पर राज्य बनाने की मांग उठने लगी। इसके कारण भारत सरकार को (दिसंबर 1953 में) एक तीन सदस्यीय राज्य पुनर्गठन आयोग, फजल अली की अध्यक्षता में गठित करने के लिए विवश होना पड़ा। इसके अन्य दो सदस्य थे-के.एम. पणिक्कर और एच. एन. कुंजरू। इसने अपनी रिपोर्ट 1955 में पेश की और इस बात को व्यापक रूप से स्वीकार किया कि राज्यों के पुनर्गठन में भाषा को मुख्य आधार बनाया जाना चाहिये। लेकिन इसने ‘एक राज्य एक भाषा’ के सिद्धांत को अस्वीकार कर दिया। इसका मत था कि किसी भी राजनीतिक इकाई के पुनर्निर्धारण में भारत की एकता को प्रमुखता दी जानी चाहिए। समिति ने किसी राज्य पुनर्गठन योजना के लिए चार बड़े कारकों की पहचान की:

  1. देश की एकता एवं सुरक्षा की अनुरक्षण एवं संरक्षण।
  2. भाषायी व सांस्कृतिक एकरूपता।
  3. वित्तीय, आर्थिक एवं प्रशासनिक तर्क।
  4. प्रत्येक राज्य एवं पूरे देश में लोगों के कल्याण की योजना और इसका संवर्धन ।

आयोग ने सलाह दी कि मूल संविधान के अंतर्गत चार आयामी राज्यों के वर्गीकरण को समाप्त किया जाए और 16 राज्यों एवं 3 केंद्रीय प्रशासित क्षेत्रों का निर्माण किया जाए। भारत सरकार ने बहुत कम परिवर्तनों के साथ इन सिफारिशों को स्वीकार कर लिया। राज्य पुनर्गठन अधिनियम (1956) और 7वें संविधान संशोधन अधिनियम (1956) के द्वारा भाग क और भाग ख के बीच की दूरी को समाप्त कर दिया गया और भाग ग को खत्म कर दिया गया। इनमें से कुछ को पड़ोसी राज्यों के साथ मिला दिया गया था तो कुछ को संघशासित क्षेत्रों के तौर पर पुनः स्थापित किया गया। परिणामस्वरूप 1 नवंबर, 1956 को 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेशों का गठन किया गया।

राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 द्वारा कोचीन राज्य के त्रावणकोर तथा मद्रास राज्य के मालाबार तथा दक्षिण कन्नड़ के कसरगोड़े को मिलाकर एक नया राज्य केरल स्थापित किया गया। इस अधिनियम ने हैदराबाद राज्य के तेलुगु भाषी क्षेत्रों को आन्ध्र राज्य में मिलाकर एक नये राज्य आन्ध्र प्रदेश की स्थापना की। उसी प्रकार मध्य भारत राज्य, विंध्य प्रदेश राज्य तथा भोपाल राज्य को मिलाकर मध्य प्रदेश राज्य का सृजन हुआ। पुनः इसने सौराष्ट्र और कच्छ राज्य को बॉम्बे राज्य में, कूर्ग राज्य को मैसूर राज्य में, पटियाला एवं पूर्वी पंजाब को पंजाब राज्य तथा अजमेर राज्य को राजस्थान राज्य में विलयित कर दिया। इसके अलावा इस अधिनियम द्वारा नये संघशासित प्रदेश-लक्षद्वीप, मिनीकॉय तथा अमिनदिवी द्वीपों का सृजन मद्रास राज्य से काटकर किया।

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