बंगलादेश के साथ सीमाओं का हस्तांतरण

100वां संविधान संशोधन अधिनियम 2015, को इसलिए अधिनियमित किया गया कि भारत द्वारा कुछ भूभाग का अधिग्रहण किया जाए जबकि कुछ अन्य भूभाग को बांग्लादेश को हस्तांतरित कर दिया जाए। उस समझौते के तहत जो भारत और बांग्लादेश की सरकारों के बीच हुआ। इस लेन-देन में भारत ने 111 विदेशी अंत:क्षेत्रों (enclaves) को बांग्लादेश को हस्तांतरित कर दिया जबकि बांग्लादेश ने 51 अंत:क्षेत्रों को भारत को हस्तांतरित किया। इसके साथ ही इस लेन-देन में प्रतिकूल दखलों का हस्तांतरण तथा 6.1 कि.मी. असीमांकित सीमाई क्षेत्र का सीमांकन भी शामिल था। इन तीन उद्देश्यों के लिए संशोधन ने चार राज्यों (असम, पश्चिम बंगाल, मेघालय तथा त्रिपुरा) के भूभाग से जुड़े पहली अनुसूची के प्रावधानों को भी संशोधित कर दिया। इस संशोधन की निम्नलिखित पृष्ठभूमि है:

  1. भारत और बांग्लादेश की लगभग 7 किमी लंबी साझी जमीनी सीमा है। भारत-पूर्वी पाकिस्तान जमीनी सीमा का निर्धारण 1947 के रैडक्लिफ अवार्ड के अनुसार हुआ था। विवाद रैडक्लिफ अवार्ड के कुछ प्रावधानों को लेकर हुआ जिनका समाधान 1950 के बग्गे अवार्ड (Bagge Award) के अनुसार किया जाना था। पुनः एक कोशिश इन विवादों के समाधान के लिए 1958 में नेहरू-नून समझौते के द्वारा की गई। हालांकि बेरुबाड़ी यूनियन के विभाजन को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती की गई। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुपालन में संविधान (9वां संशोधन) अधिनियम 1960 पारित किया गया। लगातार मुकदमेबाजी तथा अन्य राजनीतिक घटनाक्रमों के चलते यह अधिनियम अधिसूचित नहीं किया जा सका – भूतपूर्व पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) के भूभागों को लेकर।
  2. 16 मई, 1974 को भारत-बांग्लादेश की जमीनी सीमा के सीमांकन एवं सम्बन्धित मामलों के लिए दोनों देशों के साथ एक समझौता हुआ ताकि इस जटिल मुद्दे को हल किया जा सके। इस समझौते की भी अभिपुष्टि नहीं की जा सकी क्योंकि यह जमीन के स्थानांतरण का मामला था जिसके लिए संविधान संशोधन की जरूरत थी। इस सम्बन्ध में जमीन पर उस क्षेत्र विशेष को चिन्हित करने की जरूरत थी जिसे हस्तांतरित किया जाना था। इसके पश्चात असीमांकित जमीनी सीमा, प्रतिकूल कब्जे वाले भूभागों तथा अंत:क्षेत्रों के आदान-प्रदान को विकसित कर 6 सितंबर, 2011 को एक प्रोटोकॉल पर दस्तखत कर इस मुद्दे को हल करने का प्रयास किया गया। जोकि भारत-बांग्लादेश के बीच जमीनी सीमा समझौता 1974 का अभिन्न हिस्सा है। इस प्रोटोकॉल को असम, मेघालय, त्रिपुरा एवं पश्चिमी बंगाल राज्य सरकारों के सहयोग एवं सहमति से तैयार किया गया।

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