अबाध संचरण की स्वतंत्रता

भारतीय संविधान की अनुच्छेद 19(4) के अंतर्गत अबाध संचरण की स्वतंत्रता सम्बंधित प्रावधान निम्नवत है :

यह स्वतंत्रता प्रत्येक नागरिक को देश के किसी भी हिस्से में संचरण का अधिकार प्रदान करती है। वह स्वतंत्रतापूर्वक एक राज्य से दूसरे राज्य में या एक राज्य में एक से दूसरे स्थान पर संचरण कर सकता है। यह अधिकार इस बात को बल देता है कि भारत सभी नागरिकों के लिए एक है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सोच को बढ़ावा देना है न कि संकीर्णता को।

इस स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध लगाने के दो कारण हैंआम लोगों का हित और किसी अनुसूचित जनजाति की सुरक्षा या हित। जनजातीय क्षेत्रों में बाहर के लोगों के प्रवेश को उनकी विशेष संस्कृति, भाषा, रिवाज और जनजातीय प्रावधानों के तहत प्रतिबंधित किया जा सकता है, ताकि उनका शोषण न हो सके।

उच्चतम न्यायालय ने इसमें व्यवस्था दी कि किसी वैश्या के संचरण के अधिकार को सार्वजनिक नैतिकता एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य के आधार पर प्रतिबंधित किया जा सकता है । बम्बई उच्च न्यायालय ने एड्स पीड़ित व्यक्ति के संचरण पर प्रतिबंध को वैध बताया।

संचरण की स्वतंत्रता के दो भाग हैं-आंतरिक (देश में निर्बाध संचरण) और बाह्य (देश के बाहर घूमने का अधिकार) तथा देश में वापस आने का अधिकार। अनुच्छेद 19 मात्र पहले भाग की रक्षा करता है। दूसरे, भाग को अनुच्छेद 21 (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार) व्याख्यायित करता है।