लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता

अनुच्छेद 16 में राज्य के अधीन किसी पद पर नियोजन या नियुक्ति से संबंधित विषयों में सभी नागरिकों के लिए अवसर की समता होगी। किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता या केवल धर्म, वंश, जाति, लिंग, जन्म का स्थान, या निवास के स्थान के आधार पर राज्य के किसी भी रोजगार एवं कार्यालय के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा।

लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता के साधारण नियम में तीन अपवाद हैं:

  1. संसद किसी विशेष रोजगार के लिए निवास की शर्त आरोपित कर सकती है। जैसा कि सार्वजनिक रोजगार (जिसमें निवास की जरूरत हो) अधिनियम 1957 कुछ वर्ष बाद 1974 में समाप्त हो गया। इस समय आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना के अतिरिक्त किसी अन्य राज्य में यह व्यवस्था नहीं है।
  2. राज्य नियुक्तियों के आरक्षण की व्यवस्था कर सकता है या किसी पद को पिछड़े वर्ग के पक्ष में बना सकता है जिनका कि राज्य में समान प्रतिनिधित्व नहीं है।
  3. विधि के तहत किसी संस्था या इसके कार्यकारी परिषद के सदस्य या किसी की धार्मिक आधार पर व्यवस्था की जा सकती है।
  4. राज्य को नागरिकों के किसी भी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के पक्ष में 10% नियुक्तियों या पदों के आरक्षण का प्रावधान करने की अनुमति है। 10% तक का यह आरक्षण मौजूदा आरक्षण के अतिरिक्त होगा। इस प्रयोजन के लिए, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को राज्य द्वारा समय-समय पर परिवार की आय और आर्थिक नुकसान के अन्य संकेतकों के आधार पर अधिसूचित किया जाएगा।