Government of India Act of 1919 / भारत शासन अधिनियम, 1919:

After Indian Councils Act of 1861, 1892 and 1909 British Govt. enacted new Act. i.e Government of India Act of 1919.

Government of India Act of 1919:

On August 20, 1917, the British Government declared, for the first time, that its objective was the gradual introduction of responsible Government in India.

The Government of India Act of 1919 was thus enacted, which came into force in 1921. This Act is also known as Montagu Chelmsford Reforms (Montagu was the Secretary of State for India and Lord Chelmsford was the Viceroy of India).

The features of this Act were as follows:

  1. It relaxed the central control over the provinces by demarcating and separating the central and provincial subjects. The central and provincial legislatures were authorised to make laws on their respective list of subjects. However, the structure of government continued to be centralised and unitary.
  2. It further divided the provincial subjects into two parts– transferred and reserved. The transferred subjects were to be administered by the Governor with the aid of Ministers responsible to the legislative council. The reserved subjects, on the other hand, were to be administered by the Governor and his executive council without being responsible to the legislative council. This dual scheme of governance was known as ‘dyarchy’–a term derived from the Greek word diarche which means double rule. However, this experiment was largely unsuccessful.
  3. It introduced, for the first time, bicameralism and direct elections in the country. Thus, the Indian legislative council was replaced by a bicameral legislature consisting of an Upper House (Council of State) and a Lower House (Legislative Assembly). The majority of members of both the Houses were chosen by direct election.
  4. It required that the three of the six members of the Viceroy’s executive Council (other than the Commander-in-Chief) were to be Indian.
  5. It extended the principle of communal representation by providing separate electorates for Sikhs, Indian Christians, Anglo-Indians and Europeans.
  6. It granted franchise to a limited number of people on the basis of property, tax or education.
  7. It created a new office of the High Commissioner for India in London and transferred to him some of the functions hitherto performed by the Secretary of State for India.
  8. It provided for the establishment of a public service commission. Hence, a Central Public Service Commission was set up in 1926 for recruiting civil servants.
  9. It separated, for the first time, provincial budgets from the Central budget and authorised the provincial legislatures to enact their budgets.
  10. It provided for the appointment of a statutory commission to inquire into and report on its working after ten years of its coming into force.

भारत शासन अधिनियम, 1919:

20 अगस्त, 1917 को ब्रिटिश सरकार ने पहली बार घोषित किया कि उसका उद्देश्य भारत में क्रमिक रूप से उत्तरदायी सरकार की स्थापना करना था।

क्रमिक रूप से 1919 में भारत शासन अधिनियम बनाया गया, जो 1921 से लागू हुआ। इस कानून को मांटेग-चेम्सफोर्ड सुधार भी कहा जाता है (मांटेग भारत के राज्य सचिव थे, जबकि चेम्सफोर्ड भारत के वायसराय थे)। अधिनियम की विशेषताएं 

  1. केंद्रीय और प्रांतीय विषयों की सूची की पहचान कर एवं उन्हें पृथक् कर राज्यों पर केंद्रीय नियंत्रण कम किया गया। केंद्रीय और प्रांतीय विधान परिषदों को, अपनी सूचियों के विषयों पर विधान बनाने का अधिकार प्रदान किया गया। लेकिन सरकार का ढांचा केंद्रीय और एकात्मक ही बना रहा। 
  2. इसने प्रांतीय विषयों को पुन: दो भागों में विभक्त कियाहस्तांतरित और आरक्षित । हस्तांतरित विषयों पर गवर्नर का शासन होता था और इस कार्य में वह उन मंत्रियों की सहायता लेता था, जो विधान परिषद के प्रति उत्तरदायी थे। दूसरी ओर आरक्षित विषयों पर गवर्नर कार्यपालिका परिषद की सहायता से शासन करता था, जो विधान परिषद के प्रति उत्तरदायी नहीं थी। शासन की इस दोहरी व्यवस्था को द्वैध (यूनानी शब्द डाई-आर्की से व्युत्पन्न) शासन व्यवस्था कहा गया। हालांकि यह व्यवस्था काफी हद तक असफल ही रही।
  3. इस अधिनियम ने पहली बार देश में द्विसदनीय व्यवस्था और प्रत्यक्ष निर्वाचन की व्यवस्था प्रारंभ की। इस प्रकार भारतीय विधान परिषद के स्थान पर द्विसदनीय व्यवस्था यानी राज्यसभा और लोकसभा का गठन किया गया। दोनों सदनों के बहुसंख्यक सदस्यों को प्रत्यक्ष निर्वाचन के माध्यम से निर्वाचित किया जाता था।
  4. इसके अनुसार, वायसराय की कार्यकारी परिषद के छह सदस्यों में से (कमांडर-इन-चीफ़ को छोड़कर) तीन सदस्यों का भारतीय होना आवश्यक था।
  5. इसने सांप्रदायिक आधार पर सिखों, भारतीय ईसाईयों, आंग्ल-भारतीयों और यूरोपियों के लिए भी पृथक् निर्वाचन के सिद्धांत को विस्तारित कर दिया। 
  6. इस कानून ने संपत्ति, कर या शिक्षा के आधार पर सीमित संख्या में लोगों को मताधिकार प्रदान किया।
  7. इस कानून ने लंदन में भारत के उच्चायुक्त के कार्यालय का सृजन किया और अब तक भारत सचिव द्वारा किए जा रहे कुछ कार्यों को उच्चायुक्त को स्थानांतरित कर दिया गया।
  8. इससे एक लोक सेवा आयोग का गठन किया गया। अतः 1926 में सिविल सेवकों की भर्ती के लिए केंद्रीय लोक सेवा आयोग का गठन किया गया।
  9. इसने पहली बार केंद्रीय बजट को राज्यों के बजट से अलग कर दिया और राज्य विधानसभाओं को अपना बजट स्वयं बनाने के लिए अधिकृत कर दिया।
  10. इसके अंतर्गत एक वैधानिक आयोग का गठन किया गया, जिसका कार्य दस वर्ष बाद जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करना था।

Next :  Simon Commission and Communal Award.

Also read : Regulating Act of 1773, Charter Acts of 1793, 1813, 1833 and 1853Pitt’s India Act of 1784, Indian Councils Act of 1861, 1892 and 1909

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