लाल और पीली मिट्टी

लाल मिट्टी का विकास दक्कन के पठार के पूर्वी तथा दक्षिणी भाग में कम वर्षा वाले उन क्षेत्रों में हुआ है, जहाँ रवेदार आग्नेय चट्टानें पाई जाती हैं।

  • भारतीय मिट्टी क्षेत्र का 25% हिस्सा शामिल है
  • लोहे और निकेल वाले ग्रेनाइट और कायांतरित चट्टानों के कटाव के कारण निर्मित
  • सबसे अच्छी जल निकास वाली मिट्टी, कम से कम जल-जमाव के लिए अतिसंवेदनशील
  • चूना, फॉस्फेट, लोहा, पोटाश, ह्यूमस में समृद्ध लेकिन नाइट्रोजन और फास्फोरस की कमी होती है 
  • यह अधिकतम फसल-विविधता का समर्थन कर सकता है
  • खाद्य सुरक्षा और पोषण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण
  • लेकिन मिट्टी-अपरदन के लिए सबसे कमजोर है
  • शुष्क क्षेत्र – सूखाड = गरीबी
  • भूमि का स्खलन
  •  ईंट बनाने में प्रयोग से शीर्ष मिट्टी का अपरदन

पश्चिमी घाट के गिरिपद क्षेत्र की एक लंबी पट्टी में लाल दुमटी मिट्टी पाई जाती है। पीली और लाल मिट्टीएँ ओडिशा तथा छत्तीसगढ़ के कुछ भागों और मध्य गंगा के मैदान के दक्षिणी भागों में पाई जाती है।

इस मिट्टी का लाल रंग रवेदार तथा कायांतरित चट्टानों में लोहे के व्यापक विसरण के कारण होता है। जलयोजित होने के कारण यह पीली दिखाई पड़ती है। महीने कणों वाली लाल और पीली मिट्टीएँ सामान्यतः उर्वर होती हैं। इसके विपरीत मोटे कणों वाली उच्च भूमियों की मिट्टीएँ अनुर्वर होती हैं। इनमें सामान्यतः नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और ह्यूमस की कमी होती है।