12. वृद्धि एवं प्रजनन (Growth & Production)

वृद्धि एवं प्रजनन (Growth & Production)

Growth: The nutrient and energy left over after performing biological functions and repairing the breakdown causes synthesis of new Protoplasm.

This increases the size and weight of the cell. The process by which the complete tissue is transformed into specific cells by losing total power and is called differentiation.

वृद्धि(Growth): जैविक क्रियाओं को करने के बाद व टूट-पफूट की मरम्मत के बाद जो पोषक तत्व व ऊर्जा अतिरिक्त बच जाते हैं, उससे नए जीवद्रव्य (Protoplasm) का संश्लेषण होता है।

इससे कोशिका की माप (Size) व भार बढ़ते हैं। वह प्रक्रिया जिसके द्वारा पूर्णशक्तता खोकर विशिष्ट कोशिकाओं में रूपान्तरित होकर विशिष्ट ऊतकों का निर्माण करती है, विभेदन (differentiation) कहलाती है।

Different stages of growth(वृद्धि की विभिन्न प्रावस्थाएं):

By growing from unicellular zygotes, we can divide the whole process of development of a multicellular organism into the following stages.

एककोशिकीय युग्मनज से वृद्धि होकर बहुकोशिकीय जीवधारी के विकास की पूरी प्रक्रिया को हम निम्न अवस्थाओं में बांट सकते हैं।

  1. Cell division: In this phase, cells divide frequently, as a result, the number of cells increase. Cell elongation, water ingestion, photosynthesis, synthesis of organisms, result in increased measurement of the cell.

कोशिका विभाजन (Cell division): इस प्रावस्था में कोशिकाएं बार-बार विभाजित होती है, फलस्वरूप, कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि होती है। प्रकाश कोशिका दीर्घीकरण (Cell elongation), जल ग्रहण, प्रकाश संश्लेषण, जीव द्रव्य के संश्लेषण, के फलस्वरूप कोशिका की माप में बढ़ोतरी होती है।

2. Cell Maturation: Due to chemical and physical changes in cells, there are changes in the functionalities in the form of cells. Due to specialization, it forms different types of cells, tissues and organs.

कोशिका (Cell Maturation): कोशिकाओं में रासायनिक तथा भौतिक परिवर्तन होने के कारण कोशिकाओं के रूप में कार्यिकी में बदलाव आ जाते हैं। विशिष्टीकरण के कारण इससे भिन्न-भिन्न प्रकार की कोशिकाएं, ऊतक व अंग बन जाते हैं।

Reproduction: The ability of reproduction is the most important feature of organisms. Generation generates the next generation from one generation of organisms. Generation also plays an important role in the growth of new castes. These are of the following types.

  1. Asexual Reproduction: When an organism reproduces without producing gametes, it is called asexual reproduction.
  2. Sexual Reproduction: In sexual reproduction, a new organism is born by conjugation between gametes produced by two members of the same caste but with two different members. The possibility of variations increases as a result of sexual reproduction.

जनन (Reproduction): जनन की क्षमता जीवधारियों का अत्यन्त महत्वपूर्ण लक्षण है। जनन द्वारा जीवधारियों की एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी का जन्म होता है। नई जातियों के उद्विकास में भी जनन की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह निम्न प्रकार के होते हैं।

  1. अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction): जब कोई जीव बिना युग्मक उत्पन्न किए जनन करे तो इसे अलैंगिक जनन कहते हैं।
  2. लैंगिक जनन (Sexual Reproduction): लैंगिक जननमें दो विभिन्न लक्षणों वाले, परन्तु एक ही जाति के दो सदस्यों द्वारा उत्पन्न युग्मकों के बीच संयुग्मन से नए जीवधारी का जन्म होता है। लैंगिक जनन के फलस्वरूप विभिन्नताओं की संभावना बढ़ जाती है।

Reproductive System in Human Beings:

A human being is a lingual creature. Male and female reproductive organs are different.

मानव में जनन तन्त्रा (Reproductive System in Human Beings): मनुष्य एक लिंगी प्राणी है। नर तथा मादा जनन अंग अलग-अलग होता है।

  1. Male Reproductive Organs: Male reproductive system consists of the following organs-

    Male Reproductive Organs
    Male Reproductive Organs

i) Testis and its systems, ii) Venus vessels, iii) Urinary tract or Urethra, iv) Sub-genital organs, v) Sub-texts

नर जनन अंग (Male Reproductive Organs): नर जनन तन्त्रा निम्नलिखित अंगों से मिलकर बनते हैं-

i) वृषण एवं उसकी प्रणालियां, ii) शुक्र वाहिकाएं, iii) मूत्रा मार्ग या सूरेथ्रा, iv) उप-जनन अंग, v) उप-ग्रन्थियां

2. Female Reproductive Organs: The female reproductive system consists of the following organs.

Female Reproductive Organs
Female Reproductive Organs

i) a pair of ovaries, ii) a pair of ovaries, iii) clitoris, iv) sub-glands.

मादा जनन अंग (Female Reproductive Organs): मादा जनन तन्त्रा निम्नलिखित अंगों से मिलकर बना है।

i) एक जोड़ी अण्डाशय, ii) एक जोड़ी अण्डवाहिनियां, iii) क्लाइटोरिस, iv) उप-ग्रन्थियां।

Copulation: Internal fertilization occurs in humans.

In humans, the placenta of the fetus occurs. The placenta remains attached to the navel of the fetus and on the other side to the uterine wall. In this way, the nutritional growth of the fetus is complete in the uterus of the womb.

In humans, fetal growth occurs within the body of the breast and is visible. That is, larvae are not found. In humans, it takes about 9 months 7 days from fertilization to birth.

मैथुन (Copulation):  मानव में आन्तरिक निषेचन होता है।

मनुष्य में भ्रूण का अपरा (Placenta) द्वारा होता है। अपरा भ्रूण की नाभि से तथा दूसरी ओर गर्भाशय की दीवार से जुड़ा रहता है। इस प्रकार भ्रूण का पोषण वृद्धि, स्त्रा के गर्भाशय में ही सम्पूर्ण होता है।

मनुष्य में भ्रूण का परिवर्धन स्त्रा के शरीर के भीतर होता है तथा प्रत्यक्ष होता है। अर्थात लारवा नहीं पाया जाता है। मनुष्य में निषेचन से जन्म तक लगभग 9 माह 7 दिन लगते हैं।