संविधान सभा का गठन

COMPOSITION OF THE CONSTITUENT ASSEMBLY संविधान सभा की संरचना

As per the provision of the Cabinet Mission Plan, the Constituent Assembly was constituted in November 1946
The features of the scheme were

  1. The total strength of the Constituent Assembly was to be 389. Of these, 296 seats were to be allotted to British India and 93 seats to the princely states. Out of 296 seats allotted to the British India, 292 members were to be drawn from the eleven governors’ provinces and four from the four Chief Commissioners’ provinces, one from each.
  2. Each province and princely state (or group of states in case of small states) were to be allotted seats in proportion to their respective population. Roughly, one seat was to be allotted for every million population.
  3. Seats allocated to each British province were to be divided among the three principal communities–Muslims, Sikhs and General (all except Muslims and Sikhs), in proportion to their population.
  4. The representatives of each community were to be elected by members of that community in the provincial legislative assembly and voting was to be by the method of proportional representation by means of single transferable vote.
  5. The representatives of the princely states were to be nominated by the heads of the princely states.

It is, thus, clear that the Constituent Assembly was to be a partly elected and partly nominated body. Moreover, the members were to be indirectly elected by the members of the provincial assemblies, who themselves were elected on a limited franchise.

The elections to the Constituent Assembly (for 296 seats allotted to the British Indian Provinces) were held in July-August 1946. The Indian National Congress won 208 seats, the Muslim League 73 seats and the small groups and independents got the remaining 15 seats. However, the 93 seats allotted to the princely states were not filled as they decided to stay away from the Constituent Assembly.

Although the Constituent Assembly was not directly elected by the people of India on the basis of adult franchise, the Assembly comprised representatives of all sections of the Indian society– Hindus, Muslims, Sikhs, Parsis, Anglo-Indians, Indian Christians, SCs, STs including women of all these sections. The Assembly included all important personalities of India at that time, with the exception of Mahatma Gandhi.

नवंबर 1946 में कैबिनेट मिशन योजना द्वारा बनाई गई योजना के तहत संविधान सभा का गठन किया गया था।
योजना की विशेषताएं इस प्रकार थीं:

  1. संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या 389 होनी थी। इनमें से 296 सीटें ब्रिटिश भारत और 93 सीटें देसी रियासतों को आवंटित की जानी थीं। ब्रिटिश भारत को आवंटित की गईं 296 सीटों में 292 सदस्यों का चयन 11 गवर्नरों के प्रांतों और चार का चयन मुख्य आयुक्तों के प्रांतों (प्रत्येक में से एक) से किया जाना था।
  2. हर प्रांत व देसी रियासतों (अथवा छोटे राज्यों के मामले में राज्यों के समूह) को उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें आवंटित की जानी थीं। मोटे तौर पर कहा जाए तो प्रत्येक दस लाख लोगों पर एक सीट आवंटित की जानी थी।
  3. प्रत्येक ब्रिटिश प्रांत को आवंटित की गई सीटों का निर्धारण तीन प्रमुख समुदायों के बीच उनकी जनसंख्या के अनुपात में किया जाना था। ये तीन समुदाय थे – मुस्लिम, सिख व सामान्य (मुस्लिम और सिख को छोड़कर)।
  4. प्रत्येक समुदाय के प्रतिनिधियों का चुनाव प्रांतीय असेंबली में उस समुदाय के सदस्यों द्वारा किया जाना था और एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से समानुपातिक प्रतिनिधित्व तरीके से मतदान किया जाना था।
  5. देसी रियासतों के प्रतिनिधियों का चयन रियासतों के प्रमुखों द्वारा किया जाना था।

इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि संविधान सभा को आंशिक रूप से निर्वाचित और आंशिक रूप से नामांकित निकाय होना था। इसके अलावा, सदस्यों को प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुना जाना था, जो स्वयं एक सीमित मताधिकार पर चुने गए थे।

संविधान सभा (ब्रिटिश भारतीय प्रांतों को आवंटित 296 सीटों के लिए) के चुनाव जुलाई-अगस्त 1946 में हुए थे। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 208 सीटें, मुस्लिम लीग ने 73 सीटें और छोटे समूहों और निर्दलीय ने शेष 15 सीटें हासिल कीं। हालाँकि, रियासतों को आवंटित 93 सीटें नहीं भरी गईं क्योंकि उन्होंने संविधान सभा से दूर रहने का फैसला किया।

हालाँकि संविधान सभा को वयस्क मताधिकार के आधार पर भारत के लोगों द्वारा सीधे नहीं चुना गया था, लेकिन सभा में भारतीय समाज के सभी वर्गों के प्रतिनिधि शामिल थे- हिंदू, मुस्लिम, सिख, पारसी, एंग्लो-इंडियन, भारतीय ईसाई, एससी, एसटी इन सभी वर्गों की महिलाओं सहित। उस समय महात्मा गांधी के अपवाद के साथ सभा में भारत की सभी महत्वपूर्ण हस्तियां शामिल थीं।