2. कोशिका विभाजन(Cell Division)

कोशिका विभाजन(Cell Division)

  • There are about 5 thousand billion cells in our body.
  • The cells of all multicellular organisms are destroyed all the time. Due to some wear and tear and some accidents.
  • It is due to these cell division that the body grows.
  • The cell in which division occurs is called maternal cell or reproductive cell. Cells that are formed by division in the genital cell are called progenitor cells.
  • There are two types of cell division –

1. Segmentation (MITOSIS) and 2. Meiosis.

  •  हमारे शरीर में लगभग 5 हजार अरब कोशिकाएं पायी जाती है।
  • सभी बहुकोशिकीय जीवधारियों की कोशिकाएं हर समय नष्ट होती है। कुछ टूट-फूट तथा कुछ दुर्घटनाओं के कारण।
  • इन कोशिका विभाजन के कारण ही शरीर में वृद्धि होती है।
  • जिस कोशिका में विभाजन होता है उसे मातृकोशा या जनन कोशा कहते हैं। जनन कोशा में विभाजन से जो कोशिकाएं बनती है, उन्हें संतति कोशिकाएं कहते हैं।
  • कोशिका विभाजन दो प्रकार का होता है-
  1. समसूत्रा विभाजन (MITOSIS) तथा 2. अर्द्धर्सूत्रा विभाजन(Meiosis)।

समसूत्रा विभाजन(MITOSIS) :

Mito means Sutra and Oasis means stage. This process was first named mitosis by the German biologist Walther Fraleming in 1879 AD. This process is divided into two parts. A. Karyokinesis and B. Cytokinesis

माइटो का अर्थ सूत्रा तथा ओसिस का अर्थ है अवस्था। इस प्रक्रिया को सर्वप्रथम 1879 ई. में जर्मनी के जीव वैज्ञानिक वाल्थर फ्रलेमिंग ने माइटोसीस का नाम दिया। इस प्रक्रिया को दो भागों में बांटा गया है।

A. केन्द्रक विभाजन(Karyokinesis) और  B. कोशिका-द्रव्य विभाजन(Cytokinesis)

A. Karyokinesis(केन्द्रक विभाजन)

It can be divided into five stages.

इसे पांच अवस्थाओं में बांटा जा सकता है।

  1. Interphase: This is the stage before partition begins. This is a very active state. The entire preparation of cell division takes place at this stage. In this, synthesis of cells takes place and the size of the cell increases. The nucleus is conspicuous and forms ribosomes. The substances that make up the chromosomes are synthesized. Each chromosome is also replicated. This doubles the number of chromosomes.
  2. Prophase: The beginning of real division. In this, the chromosome shrinks and becomes smaller. Each chromosome is completely divided into two equal parts in length. These half parts are called semi-chromosomes. The nucleus gradually shrinks and disappears. Both asterisks in cells are separated. By the end of the prophase, the nucleus also disintegrates.
  3. Metaphase – This is a short phase and this process is completed in 2-10 minutes. At its beginning a spindle of fibers is formed. It has two poles. The chromosomes are attached to the fibers of the Turks by their respective centomiers and are arranged on the middle line of the Turk. At that time the chromosomes become small and thick in size.
  4. Anaphase – This stage ends in 2-3 minutes only. In this phase, the centromere of each chromosome divides into two parts. In this stage two separate chromosomes were formed from each chromosome. Groups of chromosomes can be seen in two parts in the cell and both groups have equal number of chromosomes.
  5. Telophase – In this stage the nucleus and nucleus cover appear. In this way two centers are formed. Turks disappear and the chromosomes become disintegrated and take the form of finely entangled threads. That is, the chromatin changes again.
  1. अन्तरावस्था(Interphase): यह विभाजन प्रारंभ होने से पूर्व की अवस्था है। यह अत्यधिक क्रियाशील अवस्था है। कोशिका विभाजन की पूरी तैयारी इसी अवस्था में होती है। इसी में कोशिकांगो का संश्लेषण होता है व कोशिका के आकर में वृद्धि होती है। केन्द्रक सुस्पष्ट होता है व राइबोसोम का निर्माण करता है। गुणसूत्रों का निर्माण करने वाले पदार्थ संश्लेषित हो जाते हैं। प्रत्येक गुणसूत्रा भी प्रतिकृत हो जाता है। इससे गुणसूत्रों की संख्या दुगुनी हो जाती है।
  2. पूर्वावस्था(Prophase): वास्तविक विभाजन की शुरुआत होती है। इसमें गुणसूत्रा सिकुड़ कर छोटी हो जाती है। प्रत्येक गुणसूत्रा लम्बाई में पूरी तरह से दो बराबर भागों में विभाजित हो जाता है। इन आधे भागों को अर्द्ध गुणसूत्रा कहते हैं। केन्द्रिका धीरे-धीरे छोटा होता है और लुप्त हो जाता है। कोशिकाओं में दोनों तारक केन्द्र अलग हो जाते हैं। प्रोफेज के अंत तक केन्द्रक आवरण भी विघटित हो जाता है।

    MITOSIS
    MITOSIS
  3. मध्यावस्था(Metaphase) – यह छोटी अवस्था है तथा 2-10 मिनट में यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है। इसके शुरुआत में तंतुओं की एक तुर्क(Spindle) बन जाती है। इसके दो धु्रव होते हैं। गुणसूत्रा अपने-अपने सेन्टोमियर द्वारा तुर्क के तंतुओं से चिपक जाते हैं व तुर्क की मध्य रेखा पर आकर व्यवस्थित हो जाते है। उस समय गुणसूत्रा छोटे तथा आकार में मोटे हो जाते हैं।
  4. पश्चावस्था(Anaphase) – यह अवस्था सिपर्फ 2-3 मिनटों में समाप्त हो जाती है। इस प्रावस्था में प्रत्येक गुणसूत्रा का सेन्ट्रोमियर दो भाग में विभाजित हो जाता है। इस अवस्था में प्रत्येक गुणसूत्रा से दो पृथक-पृथक गुणसूत्रा बन गए। कोशिका में दो भागों में गुणसूत्रों के समूह देखे जा सकते हैं और दोनों समूहों में गुणसूत्रों की संख्या बराबर-बराबर होती है।
  5. अन्त्यावस्था(Telophase) – इस अवस्था में केन्द्रक तथा केन्द्रक आवरण प्रकट हो जाते हैं। इस प्रकार दो केन्द्रकों का निर्माण हो जाता है। तुर्क लुप्त हो जाती है व गुणसूत्रा अकुण्डलित होकर पुनः पतले उलझे हुए धागों का रूप ले लेते हैं। अर्थात् पुनः क्रोमैटिन में परिवर्तन हो जाते हैं।

B. कोशिका-द्रव्य विभाजन(Cytokinesis)

Nuclear division is followed by division of cytoplasm. It happens in two ways.

केन्द्रक विभाजन के बाद कोशिका-द्रव्य का विभाजन होता है। यह दो प्रकार से होता है।

  1. Cell Furrow – Animal cells do not have a cell wall. Therefore, the outer layer made only of cell art is quite flexible. On the central part of the cell, the cell art begins to recede. As a result, the two cells separate and become child cells.
  2. Cell Plate – Due to the cell wall in the cells of plants, the outer layer is very firm and cannot sink like a animal cell. In such a situation, a new cell wall is formed in the middle of the cell to divide cytoplasm which separates the two cells. For this, a cell plate starts to form from the center of the cell and moves towards the periphery.
  1. कोशिका खांच (Cell Furrow)– जन्तु कोशिकाओं में कोशिका भित्ति नहीं होती है। इसलिए केवल कोशिका कला से बनी बाहरी परत काफी लचीली होती है। कोशिका के मध्य भाग पर कोशिका कला चारों ओर से धंसना शुरू होती है। फलस्वरूप दोनों कोशिकाएं अलग-अलग हो जाती हैं व संतति कोशिकाएं बन जाती हैं।
  2. कोशिका प्लेट(Cell Plate) – पोधों की कोशिकाओं में कोशिका भित्ति होने के कारण बाहरी परत काफी दृढ़ होता है और जन्तु कोशिका की तरह धंस नहीं सकती है। ऐसी स्थिति में कोशिका द्रव्य को विभाजित करने के लिए कोशिका के बीचों बीच एक नई कोशिका भित्ति बनती है जो कि दोनों कोशिकाओं को अलग कर देती है। इसके लिए कोशिका के केन्द्र से एक कोशिका प्लेट बननी शुरू होती है और परिधि की ओर बढ़ती जाती है।

Importance of Mitosis

The objective of the entire process of chromosome division is the equal distribution of exact copies of chromosomes in the progeny cells. Mitosis has the following importance in the life of organisms-

  1. Providing genetic stability.
  2. This division results in growth.
  3. Origin of new organism through sexual reproduction.
  4. Repairing broken limbs. Meiosis

समसूत्रा विभाजन का महत्व

समसूत्रा विभाजन की पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य है- संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों की हूबहू नकल का बराबर-बराबर वितरण। माइटोसिस को जीवधारियों के जीवन में निम्नलिखित महत्व है-

  1. आनुवांशिक स्थायित्व प्रदान करना।
  2. इस विभाजन के फलस्वरूप वृद्धि होती है।
  3. लैंगिक प्रजनन के द्वारा नये जीव की उत्पत्ति।
  4. टूट-फूट की अंगों का मरम्मत करना।

अर्द्ध्सुत्री विभाजन(Meiosis)

In 1905 AD, Farmer and Moore named the diaphragmatic division of cells as Miosis. Miosis literally means reduction. As a result of this division, the number of chromosomes in the progeny cells is half that of the parent cell, hence it is called Miosis. It has two stages. First meiosis and Second Meiosis

1905 ई. में फार्मर तथा मूरे ने कोशिकाओं में अर्द्ध्सुत्री विभाजन को मिओसिस नाम दिया। मिओसिस का शाब्दिक अर्थ है न्यूनीकरण। इस विभाजन के फलस्वरूप संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या जनक कोशिका की तुलना में आधी होती है इसलिए इसे मिओसिस कहा जाता है। इसकी दो अवस्था होती है- प्रथम अर्द्ध्सुत्री विभाजन और द्वितीय अर्द्ध्सूत्रीय विभाजन

A. MIOSIS-I: The number of chromosomes is halved, but the chromosomes are not divided. This phase is also called reduction division. It is completed in four stages.

  1. Prophase-I: It has five stages.
    1. Leptotene -This stage lasts only a few hours. In this sequence, chromatin is annihilated and begins to appear as long but distinct chromosomes. Although the chromosome appears clear, its chromatids do not appear separately.
    2. Zygotene – This is also only for a few hours. The chromosomes become more thick and small. Therefore, they appear more clear. Homologous chromosomes are attracted towards each other and not only come close to each other, but also meet in length from one end to the other. This type of pairing of chromosomes is called Synapsis and paired pairs are called Bivalents.

    3. Pachytene – In chromosomes, it becomes smaller and thicker. Both homologous chromosomes of the pair bind to each other. Both chromatids of each homologous chromosome now appear to be distinct.
    4. Diplotene – In this the quaternary of chromosomes is now more pronounced. Repulsion occurs between homologous chromosomes. The result is separated from each other. Yet at some points it is interconnected. This union is called Chiasma. At this site, chromatid segments exchange between homologous chromosomes. This process is called crossing-over.

    5. Diakinesis – In this stage, the four chromatids of each pair appear to be separate, but still appear to be connected in many places. This is called bonded chromatid. They are attached at the centromere, but the chromatids of two different chromosomes of the homologous chromosome are shown to be interconnected by the chiasma. The nucleus and nucleus cover begin to fade. The construction of the Spindle begins.
  2. Metaphase-I- The nucleus and nucleus cover completely disappear. The Turk is fully prepared. On the middle line of the Turks, the bivalents are arranged in such a way that their centromere is towards the pole and the arms are towards the middle line. The centromere of one chromosome from each pair is towards one pole and the centromier of the second chromosome is towards the other pole.
  3. Anaphase-I– In this stage the centromere of any pair is not divided, but the chromatids are completely separated. Turk fibers now pull the centromere towards the opposite pole. As a result, one chromosome from each pair is pulled towards one pole and the other chromosome towards the other pole. In this way, half of the total chromosomes of the reproductive cell move towards each other.

  4. Telophase-I – The nucleus around the chromosome arriving at each pore is rebuilt. The cell division is divided by cell groove or cell plate and two progeny cells are formed which have half the chromosome than the parent cells. After this, the progeny cells reach the system but there is no duplication of DNA or chromatin. After this, there is division in both these cells. This phase of division is called Miosis-II.

A. प्रथम अर्द्ध्सुत्री विभाजन :

इसमें गुणसूत्रों की संख्या आधी रह जाती है, परन्तु गुणसूत्रों का विभाजन नहीं होता है। इस चरण को न्यूनकारी विभाजन भी कहते हैं। यह चार चरण में पूरा होता है।

Meiosis
Meiosis
  1. पूर्वावस्था I(Prophase-I) : इसके पांच चरण होते हैं।
    1. लेप्टोटीन (Leptotene) यह अवस्था केवल कुछ ही घण्टों की होती है। इसी क्रम में क्रोमैटिन कुण्डलित होकर लम्बे परन्तु स्पष्ट रूप से गुणसूत्रों के रूप में दिखाई देने लगती है। हालांकि गुणसूत्रा स्पष्ट दिखता है परन्तु उसके क्रोमैटिड अलग-अलग नहीं दिखाई पड़ते।
    2. जाइगोटीन(Zygotene) – यह भी केवल कुछ घण्टों का होता है। गुणसूत्रा अधिक मोटे व छोटे होते जाते हैं। इसलिए अधिक स्पष्ट दिखाई पड़ते हैं। समजात गुणसूत्रा एक दूसरे की ओर आकर्षित होते हैं तथा एक दूसरे के बिल्कूल समीप तो आ ही जाते हैं, बल्कि लम्बाई में भी एक सिरे से दूसरे सिरे तक मिलन कर लेते हैं। गुणसूत्रों के इस प्रकार जोड़े बनाने की क्रिया को सूत्रायुग्मन(Synapsis) कहते हैं तथा युग्मी जोड़ों को युगली(Bivalents) कहते हैं।
    3. पैकीटीन(Pachytene) – में गुणसूत्रा अधिक छोटे और मोटे हो जाते हैं। युगल के दोनों समजात गुणसूत्रा एक-दूसरे से लिपट जाते हैं। प्रत्येक समजात गुणसूत्रा के दोनों क्रोमैटिड अब अलग-अलग दिखाई देने लगते हैं।
    4. डिप्लोटीन(Diplotene) – इसमें गुणसूत्रों के चतुष्ठक अब अधिक स्पष्ट हो जाता है। समजात गुणसूत्रों के बीच प्रतिकर्षण उत्पन्न हो जाता है। परिणामस्वरूप एक दूसरे से अलग-अलग हो जाता है। फिर भी कुछ बिन्दुओं पर यह एक दूसरे से आपस में जुड़े होते हैं। इस मिलन केन्द्र को काइएज्मा(Chiasma) कहते हैं। इस स्थल पर समजात गुणसूत्रों के बीच क्रोमैटिड खण्डों का आदान-प्रदान होता है। इस प्रक्रिया को क्रॅासिंग-ओवर कहते हैं।
    5. डायकाइनेसिस(Diakinesis) -इस अवस्था में प्रत्येक युगली के चारों क्रोमैटिड पृथक दिखाई पड़ते हैं परन्तु, फिर भी कई जगह जुड़े हुए दिखाई पड़ते हैं। इसे बंधु क्रोमैटिड(Bonded chromatid) कहा जाता है। यह सेन्ट्रोमियर पर जुड़े होते हैं परन्तु समजात गुणसूत्रा के दो विभिन्न गुणसूत्रों के क्रोमैटिड आपस में काइएज्मा द्वारा जुड़े दिखाई पड़ते हैं। केन्द्रिक तथा केन्द्रक आवरण लुप्त होना शुरू हो जाते हैं। तुर्क(Spindle) का निर्माण शुरू हो जाता है।
  2. मध्यवस्था (Metaphase-I) – केन्द्रिक तथा केन्द्रक आवरण पूरी तरह लुप्त हो जाते हैं। तुर्क पूरी तरह बनकर तैयार हो जाता है। तुर्क की मध्य रेखा पर युगली(bivalent) इस प्रकार व्यवस्थित हो जाते हैं कि इनके सेन्ट्रोमियर धु्रव की ओर तथा भुजाएं मध्य रेखा की ओर होती हैं। प्रत्येक युगली में से एक गुणसूत्रा का सेन्ट्रोमियर एक धु्रव की ओर व दूसरे गुणसूत्रा का सेन्ट्रोमियर दूसरे धु्रव की ओर होता है।
  3. पश्चावस्था-I(Anaphase-I)- इस अवस्था में किसी भी युगली के सेन्ट्रोमियर को विभाजित नहीं होते परन्तु क्रोमैटिड पूरी तरह से अलग-अलग हो जाते हैं। तुर्क तन्तु अब सेन्ट्रोमियर को विपरीत धु्रव की ओर खींचते हैं। परिणामस्वरूप प्रत्येक युगली में से एक गुणसूत्रा एक धु्रव की ओर खिंच जाता है व दूसरा गुणसूत्रा दूसरे धु्रव की ओर। इस प्रकार जनन कोशिका के कुल गुणसूत्रों में से आधे गुणसूत्रा एक दूसरे धु्रव की ओर चले जाते हैं।
  4. अन्त्यावस्था-I(Telophase-I) – प्रत्येक धु्रव पर पहुंचे गुणसूत्रां के चारों ओर केन्द्रक आवरण का पुनः निर्माण हो जाता है। कोशिका-दव्य, कोशिका खांच या कोशिका प्लेट द्वारा विभाजित हो जाता है एवं दो संतति कोशिकाएं बनती हैं जिनमें जनक कोशिकाओं की तुलना में आधे गुणसूत्रा होते हैं। इसके बाद संतति कोशिकाएं व्यवस्था में पहुंच जाती है परन्तु DNA अथवा क्रोमैटिन का द्विगुणन नहीं होता। इसके पश्चात इन दोनों कोशिकाओं में विभाजन होता है। विभाजन के इस चरण को मिओसिस-II कहते हैं।

B. Meiosis II

This stage is similar to mitosis and has four stages –

  1. Prophase-II: The nucleus and nucleus cover disintegrate. Chromatids shrink and begin to become smaller and thicker. Both chromatids of each chromosome diverge in length. Only connected on centromere. The chromatids are arranged in such a way that their axes are located at a perpendicular angle to the spindles of the first semicircular division.
  2. Metaphase II: The centromere of chromosomes divides into two parts but does not separate. Thus both chromatids of each chromosome are linked only by these diploid centromere. Turks are formed and the chromosomes are affixed by the centromere to the spindle midline.

  3. Anaphase II: The centromere are completely divided. As a result, both chromatids of each chromosome are completely separated from each other. These isolated chromatids, which now independently become chromosomes, are pulled by the spindle fibers towards opposite pores. Thus two distinct groups of chromosomes are formed.
  4. Telophase-II: The nucleus cover is regenerated around both groups of chromosomes. The nucleus is also regenerated. The chromosomes become unstable. Thus, as a result of Miosis, four progenitor cells are formed from one germ cell, which has half the number of chromosomes inside it than the parent cell. Also, the characteristics of the four child cells are different from each other and parent cells.

B. द्वितीय अर्द्ध्सूत्रीय विभाजन(Meiosis II)

यह चरण माइटोसिस के समान ही होता है एवं इसमें चार चरण होते हैं-

  1. पूर्वावस्था-II(Prophase-II): केन्द्रिक तथा केन्द्रक आवरण विघटित हो जाते हैं। क्रोमैटिड सिकुड़ कर छोटे व मोटे होने लगते हैं। प्रत्येक गुणसूत्रा के दोनों क्रोमैटिड लम्बाई में अलग-अलग हो जाते हैं। केवल सेन्ट्रोमियर पर जुड़े रहते हैं। क्रोमैटिड इस तरह व्यवस्थित हो जाते हैं कि उनके अक्ष प्रथम अर्द्धर्सूत्रा विभाजन की तुर्क के लम्ब कोण पर स्थित हो।
  2. मध्यावस्था II(Metaphase II): गुणसूत्रों के सेन्ट्रोमियर दो भाग में विभक्त हो जाते हैं परन्तु अलग नहीं होते। इस प्रकार प्रत्येक गुणसूत्रा के दोनों क्रोमैटिड केवल इन द्विगुणित सेन्ट्रोमियर द्वारा जुड़े रहते हैं। तुर्क बन जाती है और गुणसूत्रा तुर्क की मध्य रेखा पर सेन्ट्रोमियर द्वारा चिपक जाते हैं।
  3. पश्चावस्था II(Anaphase II): सेन्ट्रोमियर पूरी तरह विभाजित हो जाते हैं। फलस्वरूप प्रत्येक गुणसूत्रा के दोनों क्रोमैटिड पूरी तरह से एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं। ये पृथक क्रोमैटिड जो कि अब स्वतंत्रा रूप से गुणसूत्रा बन जाते हैं, तुर्क तन्तुओं द्वारा विपरीत धु्रवों की ओर खींच लिए जाते हैं। इस प्रकार गुणसूत्रों के दो अलग-अलग समूह बन जाते हैं
  4. अन्त्यावस्था II (Telophase-II): गुणसूत्रों के दोनों समूहों के चारों ओर केन्द्रक आवरण पुनः बन जाता है। केन्द्रिक भी पुनः बन जाता है। गुणसूत्रा अकुण्डलित हो जाते हैं। इस प्रकार मिओसिस के फलस्वरूप एक जनन कोशिका से चार संतति कोशिकाएं बनती हैं जिनके अन्दर गुणसूत्रों की संख्या जनक कोशिका की तुलना में आधी होती है। साथ ही चारों संतति कोशिकाओं के लक्षण एक दूसरे से तथा जनक कोशिका से भिन्न होते हैं।
Difference between mitosis and miosis माइटोसिस एवं मिओसिस में अंतर
माइटोसिस (MITOSIS) मिओसिस(Meiosis)
1. It occurs in the body’s body cells. As a result there is no change in the number of chromosomes in the cell. This process consists of five stages.

2. The genetic material of chromosomes does not get exchanged, hence the child cell also has the same type of chromosome as the parent;

3. The genetic cell does not have genetic diversity due to the same chromosome as the parent. Two parent cells are formed from a parent.

1. यह शरीर की कायिक कोशिकाओं में होता है। फलस्वरूप कोशिका में गुणसूत्रों की संख्या में कोई परिवर्तन नहीं होता है। यह प्रक्रिया पांच अवस्थाओं होता है।

 

2. गुणसूत्रों के आनुवांश्कि पदार्थ में आदान-प्रदान नहीं होता इदसलिए संतति कोशिका में भी उसी प्रकार के गुणसूत्रा होते है जैसे जनक ;पैतृकद्ध कोशिका में।

 

3. संतति कोशिका में जनक जैसे ही क्रोमोसोम होने के कारण आनुवांशिक विविध्ता नहीं होती। एक जनक से दो संतति कोशिकाएं बनती हैं।

1. It occurs only in the sexual cell. As a result, the number of chromosomes in the progeny cells remains half that this division is completed in two subdivisions, in which the first reduction occurs. Each subdivision has 4-5 stages.

2. Genetic matter is exchanged between chromosomes. Therefore, some part of chromosome of progeny cell comes from parent cell and some part comes from maternal cell, so the cryptomes of progeny cell are different from the chromosome of parent.

3. Genetic diversity occurs due to different chromosomes from progenitor cells. Four progenitor cells are made from each parent.

1. यह केवल लैंगिक कोशिका में होता है। इसके फलस्वरूप संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या आधी रह जाती हैं यह विभाजन दो उप विभाजन में पूरा होता है जिसमें पहला न्यूनीकरण होता है। प्रत्येक उप विभाजन में 4-5 अवस्थाएं होती है।

2. गुणसूत्रों के बीच आनुवांशिक पदार्थ का आदान-प्रदान होता है। इसलिए संतति कोशिका के गुणसूत्रा में कुछ भाग पितृ कोशिका से कुछ भाग मातृ कोशिका से आ जाता है अतः संतति कोशिका के गूण सूत्रा जनकों के गुणसूत्रा से भिन्न होते है।

3. संतत्ति कोशिकाओं जनकों से भिन्न गुणसूत्रा होने के कारण आनुवांशिक विविध्ता होती है। एक-एक जनक से चार संतति कोशिका बनती हैं।

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